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मैंने तेरे ही भरोसे सद्गुरु आज सागर मैं नैया डार दई लिरिक्स (Mainne teree hee katha sadguru aaj saagar mein naiya Lyrics in Hindi) - Satsang Bhajan - Bhaktilok

167 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सद्गुरु की कृपा से पार लगाने का भजन

इस भजन के माध्यम से सद्गुरु की शरण में आने और सच्चे मार्ग पर चलने का प्रेरणादायक संदेश मिलता है।

मैंने तेरे ही भरोसे सद्गुरु आज सागर मैं नैया डार दई काहे की तो नाव बनाई काहे की पतवारयमे काहे की जंजीरसागर में नैया डार दई हृदय की नाव बनाई काहे की पतवारयामे सांसो की जंजीरसागर में नैया डार दाई कौन नाव में बैठन हारे कौन है खेवन हार याको कौन लगावे बेड़ा पारसागर में नैया डार दाई संगत नाव मै बैठन हारे सत्संग खेवन हार याको सतगुरु लगावे बेड़ा पारसागर में नैया डार दईलाल चुनरिया ओढके मै तो सदगुरु के ढ़ीग जाऊं मेरो जन्म सफल हो जाए सागर में नैया डार दई

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मुख्यता सद्गुरु पर विश्वास को दर्शाती है, जिसमें भक्ति और समर्पण का अद्भुत अनुभव होता है। भजन के प्रारंभ में, गायक सद्गुरु को संज्ञान में लेते हुए अपने मन की नैया को सागर में डालने का उल्लेख करता है, यह दिखाते हुए कि सभी मुश्किलों और चुनौतियों का सामना सद्गुरु के साहारे किया जा सकता है। भाषा में 'सागर' व्यापक जीवन अनुभव का प्रतीक है। जब वह 'नैया डार दई' कहते हैं, इसका अर्थ है कि वह अपने मन और जीवन की सभी चिंताओं को सद्गुरु के हवाले कर देते हैं। यह विश्वास दर्शाता है कि जीवन के उतार-चढ़ाव में सद्गुरु की प्रेरणा से ही सही मार्ग पर चलना संभव है।

भजन में 'कौन लगावे बेड़ा पार' का भावार्थ है कि जीवन के संकटकाल में केवल सद्गुरु ही हमें सुरक्षित रूप से पार लगा सकते हैं। यह कल्पना केवल एक नाव को चलाने की नहीं, बल्कि आत्मा के आध्यात्मिक विकास की भी है। गायक कहता है कि वह अपनी सांसे और जंजीरे भी सद्गुरु के चरणों में समर्पित कर देता है, जिससे स्पष्ट होता है कि भक्ति मार्ग में सच्चे दिल से की गई प्रार्थना और समर्पण से ही सच्चा आनंद और मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।

इस भजन का एक प्रमुख धार्मिक पहलू यह है कि यह भक्ति मार्ग का अनुसरण करता है, जिसमें सत्संग का महत्व उजागर होता है। 'संगत नाव में बैठन हारे' का अर्थ है कि सच्चे भक्तों और साधकों के संग में रहने से एक गुरु की सहायता प्राप्त होती है। यह संकेत करता है कि समर्पित भक्ति के माध्यम से, व्यक्ति अपने जीवन की नैया को सही दिशा में ले जा सकता है। उठाए गए सभी प्रश्नों का हल केवल सद्गुरु के शरण में जाकर ही मिलता है, जहां वे एक सच्चे मार्गदर्शक के रूप में प्रकट होते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का श्रीमत भागवत गीता और उपनिषदों में माधुर्य और भक्ति का अद्भुत मूल्य है। यह दिखाता है कि कैसे भक्त भगवान में पूर्ण श्रद्धा से विश्वास करके हर कठिनाई का सामना कर सकता है। इसी तरह, भगवद्गीता में कहा गया है कि जो अपने कर्मों में ईश्वर की सच्चाई को रखें और सब कुछ उनसे समर्पित करें, वे निश्चित रूप से मोक्ष प्राप्त करेंगे। यह भजन भी उसी तात्त्विक अद्वितीयता को दर्शाता है, जिससे हम सद्गुरु की कृपा से अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। इस भजन का नियमित जप करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक संतुलन प्राप्त होता है। यह जीवन में कठिनाइयों से सामना करने और ईश्वर पर विश्वास बढ़ाने में सहायक होता है। भजन के माध्यम से साधक अपने मन में श्रद्धा और प्रेम का संचार करता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति संभव होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम को करना आदर्श है। पूजा करते समय एक साफ स्थान पर बैठकर दीया या अगरबत्ती जलानी चाहिए। गहरी सांस के साथ ध्यान केंद्रित करना चाहिए और मन को शांति के भाव से भरना चाहिए। बजते हुए भजन के साथ साधक को श्रद्धा और प्रेम से अपने सद्गुरु का ध्यान करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का प्रमुख संदेश क्या है?

इस भजन का प्रमुख संदेश है कि सद्गुरु पर विश्वास करने से सभी कठिनाइयों का सामना किया जा सकता है। यह भक्ति और समर्पण की भावना को जागृत करता है।

भजन सुनने का सही समय क्या है?

यह भजन सुबह या शाम के समय सुनने के लिए सर्वोत्तम है, ताकि साधक ध्यान में स्थिरता और मानसिक शांति प्राप्त कर सके।

क्या इस भजन का नियमित जाप करने से कोई लाभ होता है?

जी हां, नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है और आध्यात्मिक रूप से प्रगति होती है, जिससे आत्मा में सच्चा आनंद मिलता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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