Kama Mantra सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

लोहे का त्रिशूल कमन्डल पीतल का लिरिक्स (Lohe ka trishul kamandal peetal ka Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan

यह भजन भगवान शिव की आराधना का अद्भुत माध्यम है, जो भक्तों को मानसिक एवं आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

भोलेनाथ का गीत: त्रिशूल और कमण्डल की महिमा

यह भजन भगवान शिव की आराधना में भक्ति और प्रेम का संचार करता है।

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का लिरिक्स (Lohe ka trishul kamandal peetal ka Lyrics in Hindi) - लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल कारूप सुहाना लागे भोले बाबा का॥मैं जब जब तुमको देखु तेरी जटा में गंगा विराजेमैं मस्त मगन हो जाऊँ और करू मैं तेरी पूजाओम नमः शिवायः ओम नमः शिवायःलोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का...मैं जब जब तुमको देखु तेरे माथे पे चन्दा सोहेमैं मस्त मगन हो जाऊँ और करू मैं तेरी पूजाओम नमः शिवायः ओम नमः शिवायःलोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का...मैं जब जब तुमको देखु तेरे गले में नागो की मालामैं मस्त मगन हो जाऊँ और करू मैं तेरी पूजाओम नमः शिवायः ओम नमः शिवायःलोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का...मैं जब जब तुमको देखु तेरे हाथ में डमरू साजेमैं मस्त मगन हो जाऊँ और करू मैं तेरी पूजाओम नमः शिवायः ओम नमः शिवायःलोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का...मैं जब जब तुमको देखु तेरे अंग में बाघम छालामैं मस्त मगन हो जाऊँ और करू मैं तेरी पूजाओम नमः शिवायः ओम नमः शिवायःलोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का...मैं जब जब तुमको देखु तेरी गोद में गणपति लालामैं मस्त मगन हो जाऊँ और करू मैं तेरी पूजाओम नमः शिवायः ओम नमः शिवायःलोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का...मैं जब जब तुमको देखु तेरे बगल में गोरा मातामैं मस्त मगन हो जाऊँ और करू मैं तेरी पूजाओम नमः शिवायः ओम नमः शिवायःलोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का...मैं जब जब तुमको देखु तेरे चरणों में नन्दी राजामैं मस्त मगन हो जाऊँ और करू मैं तेरी पूजाओम नमः शिवायः ओम नमः शिवायःलोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का...
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान शिव का भव्य रूप और उनके शक्ति एवं महासत्ताओं का वर्णन किया गया है। 'लोहे का त्रिशूल कमंडल पीतल का...' इस पंक्ति के माध्यम से भोलेनाथ के तेज और शक्ति के प्रतीक, त्रिशूल और कमंडल का महत्त्व समझाया गया है। त्रिशूल, जो कि भगवान शिव की पहचान है, त्तीन गुणों का प्रतिनिधित्व करता है: सृष्टि, स्थिति, और संहार। यहाँ भक्त कहता है कि जब भी वह भगवान शिव की भक्ति करता है, वह उन्हें अपने मन में गंगा का प्रवाह और चंद्रमा की आभा देखता है, जो उसके जीवन को शांति और सुख से भर देता है। प्रत्येक पंक्ति में यह निहित है कि भगवान शिव की दिव्यता और उनके प्रति भक्ति से ही 'मस्त मगन' भाव से पूजा की जा सकती है।

जब भक्त कहते हैं, 'मैं जब जब तुमको देखु तेरी जटा में गंगा विराजे', तो यह सन्देश है कि भगवान शिव की जटा में बहती गंगा, पवित्रता और मोक्ष का प्रतीक है। यह भक्ति का उत्सव है, जिसमें हर पंक्ति में भक्त की आस्था और श्रध्दा झलकती है। ‘तेरे माथे पे चाँद सोहे’ पंक्ति से भक्त भगवान के सौम्य स्वरूप की वंदना करता है। हर वर्णन में शिव का विहंगम रूप चित्रित किया गया है, जिससे भक्त की आत्मा को तृप्ति मिलती है। भक्त की भावना है कि शिव के रूप में, वह स्थायी सुख और शांति का अनुभव करते हैं, जिससे उनका मन और पवित्र हो जाता है।

भक्ति मार्ग की गहराई में ये लिरिक्स भगवान शिव की अनुकंपा और उनकी शक्ति के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करते हैं। शिव को सृष्टि के निर्माता, पालनकर्ता और संहारक माना गया है। इस भजन में भगवान की उपासना से जुड़े विभिन्न धार्मिक प्रतीकों का भी वर्णन है, जैसे नाग की माला, डमरू, और बाघ की खाल। इन सबके माध्यम से, यह भजन भक्त के मन में कृष्ण और शिव के अन्दर एक अद्वितीय संबंध को प्रकट करता है। शिव की आस्था के साथ, भक्त अपने जीवन की समस्याओं का समाधान खोजता है और अध्यात्म के गहरे तरंगों में गोताखोरी करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं में भगवान शिव की दिव्यता और अनुकम्पा को समर्पित है। शिव पुराण, लिंग पुराण, और महादेव के विविध स्वरूपों में भगवान शिव का वर्णन मिलता है। इस भजन में जो वस्त्र और आभूषण का उल्लेख है, जैसे कि त्रिशूल और कमंडल, उनमें असीम शक्ति का प्रतीक है। शिव जी की आराधना का यह रूप, भक्तों को मानसिक एवं आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। शिव भक्तों के लिए यह भजन एक महत्वपूर्ण साधना और तप का मार्ग है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, तनाव में कमी और आंतरिक संतुलन प्राप्त होता है। शिव की उपासना से जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। आध्यात्मिक रूप से, यह भजन भक्त को शिव के पास ले जाकर उनमें प्रेम, करुणा और सबूरी का संचार करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह के समय या संध्या के समय करना उत्तम माना जाता है। पूजा के समय स्वच्छता का ध्यान रखें और दीप जलाएं। अगरबत्ती और फूलों का अर्पण करें, साथ ही मन को शांत रखते हुए संयुक्त आसन में बैठकर ध्यान केंद्रित करें। भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा के साथ गाते रहें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य विषय क्या हैं?

इस भजन का मुख्य विषय भगवान शिव की उपासना है एवं उनकी शक्तियों का गुणगान करना है, जिसमें त्रिशूल और कमंडल का महत्त्व दर्शाया गया है।

भजन का जप कब करना चाहिए?

इस भजन का जप सुबह या शाम के समय करना सबसे अच्छा होता है, जिससे भक्त को मानसिक शांति और संतुलन मिल सके।

भजन गाने से क्या लाभ होता है?

भजन गाने से मानसिक तनाव में कमी, आध्यात्मिक उन्नति तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे भक्त की आत्मा को संतोष मिलता है।

श्रेणियां: Kama Mantra

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

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