आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
Kama Mantra

श्रित कमलाकुच गीत गोविन्द (shreet kamalaakuch geet govind Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

67 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

कमलाकुच गीत गोविन्द: भाव भक्ति का अद्भुत संगम

यह भजन श्रीकृष्ण की भक्ति में एक मधुर एवं प्रेरणादायक गीत है, जो भक्तों को अत्यधिक उल्लासित करता है।

 श्रित कमलाकुच गीत गोविन्द (shreet kamalaakuch geet govind Lyrics in Hindi) -श्रितकमलाकुचमण्डल धृतकुण्डल ए।कलितललितवनमाल जय जय देव हरे॥दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन ए।  मुनिजनमानसहंस जय जय देव हरे ॥कालियविषधरगंजन जनरंजन ए।यदुकुलनलिनदिनेश जय जय देव हरे ॥मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन ए।सुरकुलकेलिनिदान जय जय देव हरे ॥अमलकमलदललोचन भवमोचन ए।त्रिभुवनभवननिधान जय जय देव हरे ॥जनकसुताकृतभूषण जितदूषण ए।समरशमितदशकण्ठ जय जय देव हरे ॥अभिनवजलधरसुन्दर धृतमन्दर ए।श्रीमुखचन्द्रचकोर जय जय देव हरे ॥तव चरणे प्रणता वयमिति भावय ए।कुरु कुशलंव प्रणतेषु जय जय देव हरे ॥श्रीजयदेवकवेरुदितमिदं कुरुते मृदम् ।मंगलमंजुलगीतं जय जय देव हरे ॥राधे कृष्णा हरे गोविंद गोपाला नन्द जू को लाला ।यशोदा दुलाला जय जय देव हरे ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मूल विषय भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गान करना है। भजन की शुरुआत 'श्रित कमलाकुच' से होती है, जो भगवान के कमल के समान सुंदर मुख के लिए एक श्रद्धापूर्ण संबोधन है। प्रत्येक पद में भगवान की दिव्यता, लीलाओं, और उनके द्वारा किए गए उपकारों का वर्णन किया गया है। मुनियों के प्रति जिन्होंने ज्ञान की प्राप्ति की है, का उल्लेख है, जो उनके अवदान को दर्शाता है। जैसे-जैसे भजन आगे बढ़ता है, भक्त श्रीकृष्ण की नाना रूपों में भक्ति का अनुभव करते हैं, जैसे कि 'कालियविषधर गंजन' में वे कालियादह का नाश करते हैं। ये पंक्तियाँ भगवान के सर्वशक्तिमान होने को दर्शाती हैं।

इस भजन में भक्ति की विशेषता में गहराई से समाहित एक अद्भुत भावनात्मक कड़ी है। जब भक्त भगवान का ध्यान करते हैं, तो वे अपनी चिंताओं और दुखों को भूल जाते हैं। 'मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन' जैसी पंक्तियाँ मधुरता और भक्त के प्रति भगवान के संरक्षण की भावना को इंगित करती हैं। यह भगवान का वात्सल्य भरा रूप है जो भक्तों को साधारण से अद्भुत में परिवर्तित कर सकता है। भजन में समूहिकता का अनुभव भी महत्वपूर्ण है, जैसे कि 'जय जय देव हरे' का जाप भक्तों को एकसाथ बांधता है।

इस भजन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भगवान की अद्वितीयता और भक्ति मार्ग का बोध कराना है। 'अमलकमलदललोचन' और 'जनकसुताकृतभूषण' जैसी पंक्तियाँ यह प्रकट करती हैं कि भक्त होने पर जीवन में सभी सुखों का आगमन होता है। भगवान की उपासना में प्रेम और समर्पण से बड़ा कोई मार्ग नहीं है। इस भजन के माध्यम से भक्त का हृदय पूरी तरह से भगवान के प्रति समर्पित होता है, जो कि भक्ति मार्ग का सर्वोत्तम स्वरूप है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन की धार्मिक और पौराणिक दृष्टि में गहरा अर्थ है। यह भजन विशेषकर भक्ति और प्रेम के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। पौराणिक कथाओं में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएँ बार-बार उजागर होती हैं, जो कि 'महाभारत' और 'भागवत पुराण' में विस्तृत रूप से वर्णित हैं। मानवता की सेवा और भक्ति की प्रेरणा देने के लिए भगवान की लीलाओं को याद करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस भजन का गान हमें अपने जीवन में भगवान की उपस्थिति और कृपा का अनुभव कराने का साधन बनता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का लाभ मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और समर्पण की भावना को प्रगाढ़ बनाना है। नियमित रूप से इसका जाप करने से भक्त अपने जीवन में सकारात्मकता और उत्साह का अनुभव करते हैं। भक्ति में डूबने से आध्यात्मिक विकास होता है और मनुष्य अपनी आत्मा की सच्चाई को पहचानता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप विशेष रूप से सुबह के समय या संध्या के समय किया जाता है। पूजा के समय शुद्ध मन और पवित्रता से ईश्वर की पूजा करनी चाहिए। दीप जलाना और फूलों का अर्पण करना इस भजन के लिए उपयुक्त होता है। सही मुद्रा में बैठकर, मानसिक उपस्थिती के साथ इस भजन का पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान श्रीकृष्ण की महिमा और भक्ति के मार्ग की प्रेरणा देना है। यह भक्तों को श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और समर्पण का आह्वान करता है।

भजन का अर्थ क्या होता है?

इस भजन में भगवान के विभिन्न रूपों, लीलाओं और उनके प्रति भक्ति का प्रमाण दिया गया है। यह भक्ति भाव से भरपूर एक साधना का रूप है।

क्या इस भजन को एकत्रित होकर गाना चाहिए?

हाँ, इस भजन को एकत्रित होकर गाने से समुदाय की भावना मजबूत होती है और सभी भक्तों में भाईचारा और ऊर्जा का संचार होता है।

श्रेणियां: Kama Mantra

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!