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तुलसी विवाह मंगलाष्टक लिरिक्स (Tulsi Vivah Mangalashtak Lyrics in hindi) - Tulsi Vivah - Bhaktilok

87 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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तुलसी विवाह: प्रेम एवं समर्पण का महान उत्सव

तुलसी विवाह मंगलाष्टक का पाठ हमारे जीवन में प्रेम और समर्पण की भावना जगाता है।

तुलसी विवाह मंगलाष्टक लिरिक्स (Tulsi Vivah Mangalashtak Lyrics in hindi) - ॐ श्री मत्पंकजविष्टरो हरिहरौ वायुमर्हेन्द्रोऽनलःचन्द्रो भास्कर वित्तपाल वरुण प्रताधिपादिग्रहाःप्रद्यम्नो नलकूबरौ सुरगजः चिन्तामणिः कौस्तुभःस्वामी शक्तिधरश्च लांगलधरः कुवर्न्तु वो मंगलम् 1गंगा गोमतिगोपतिगर्णपतिः गोविन्दगोवधर्नौगीता गोमयगोरजौ गिरिसुता गंगाधरो गौतमःगायत्री गरुडो गदाधरगया गम्भीरगोदावरीगन्धवर्ग्रहगोपगोकुलधराः कुवर्न्तु वो मंगलम् 2नेत्राणां त्रितयं महत्पशुपतेः अग्नेस्तु पादत्रयंतत्तद्विष्णुपदत्रयं त्रिभुवने ख्यातं च रामत्रयम्गंगावाहपथत्रयं सुविमलं वेदत्रयं ब्राह्मणम्संध्यानां त्रितयं द्विजैरभिमतं कुवर्न्तु वो मंगलम् 3बाल्मीकिः सनकः सनन्दनमुनिः व्यासोवसिष्ठो भृगुःजाबालिजर्मदग्निरत्रिजनकौ गर्गोऽ गिरा गौतमःमान्धाता भरतो नृपश्च सगरो धन्यो दिलीपो नलःपुण्यो धमर्सुतो ययातिनहुषौ कुवर्न्तु वो मंगलम् 4गौरी श्रीकुलदेवता च सुभगा कद्रूसुपणार्शिवाःसावित्री च सरस्वती च सुरभिः सत्यव्रतारुन्धतीस्वाहा जाम्बवती च रुक्मभगिनी दुःस्वप्नविध्वंसिनीवेला चाम्बुनिधेः समीनमकरा कुवर्न्तु वो मंगलम् 5गंगा सिन्धु सरस्वती च यमुना गोदावरी नमर्दाकावेरी सरयू महेन्द्रतनया चमर्ण्वती वेदिकाशिप्रा वेत्रवती महासुरनदी ख्याता च या गण्डकीपूर्णाः पुण्यजलैः समुद्रसहिताः कुवर्न्तु वो मंगलम् 6लक्ष्मीः कौस्तुभपारिजातकसुरा धन्वन्तरिशन्द्रमागावः कामदुघाः सुरेश्वरगजो रम्भादिदेवांगनाःअश्वः सप्तमुखः सुधा हरिधनुः शंखो विषं चाम्बुधेरतनानीति चतुदर्श प्रतिदिनं कुवर्न्तु वो मंगलम् 7ब्रह्मा वेदपतिः शिवः पशुपतिः सूयोर् ग्रहाणां पतिःशुक्रो देवपतिनर्लो नरपतिः स्कन्दश्च सेनापतिःविष्णुयर्ज्ञपतियर्मः पितृपतिः तारापतिश्चन्द्रमाइत्येते पतयस्सुपणर्सहिताः कुवर्न्तु वो मंगलम् 8इति मंगलाष्टक समाप्त

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

तुलसी विवाह मंगलाष्टक एक अद्भुत भक्ति गीत है जो तुलसी जी के विवाह समारोह का वर्णन करता है। यह भजन भगवान श्री कृष्ण और तुलसी जी के संबंध को मंगलमय बनाने के लिए गाया जाता है। पहले श्लोक में, 'ॐ श्री मत्पंकजविष्टरो हरिहरौ...' से यह संदेश मिलता है कि ईश्वर की कृपा से सभी देवताओं और तत्वों का सम्मिलन होता है। इसका उद्देश्य सभी के लिए मंगल कामना करना है ताकि वे जीवन में आमोद और आनंद का अनुभव कर सकें। दूसरे श्लोक में विभिन्न नदियों और उनके गुणों का वर्णन किया गया है, जो जीवन की पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक है। इस तरह के श्लोक हमें सिखाते हैं कि हमें अपनी श्रद्धा में दृढ़ रहना चाहिए और अपने जीवन को पवित्र रखना चाहिए।

इस भजन में प्रेम और भक्ति की गहरी भावना मौजूद है। इसमें तुलसी के प्रति श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत वर्णन है। 'कुवर्न्तु वो मंगलम्' की पुनरावृत्ति इसे विशेष महत्व देती है, जो बताता है कि सभी देवताओं का इस विवाह के अवसर पर आशीर्वाद होना आवश्यक है। अपने जीवन में इस भजन का पाठ करते समय, हमको अपने हृदय में प्रेम, करुणा और सम्मान के भाव को उजागर करना चाहिए। यह भजन तुलसी जी की महानता को दर्शाता है और हमें यह सिखाता है कि हमें न केवल अपने परिवार के प्रति, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के प्रति आदर रखना चाहिए।

तेजस्विता और भक्ति का यह मार्ग हमें सच्चे प्रेम की ओर ले जाता है। इस भजन के श्लोकों में, भक्ति योग के स्त्रोतों का ध्यान किया गया है, जैसे कि 'गंगा गोमतिगोपतिगर्णपतिः' जो समाज में संतुलन और एकता का संदेश देता है। भक्ति मार्ग के अनुसार, व्यक्ति को अपने कर्मों में संतुलन और सद्गुण का पालन करना चाहिए। तुलसी का विवाह एक ऐसा कार्यक्रम है जो हमें यह सिखाता है कि प्यार, समर्पण और श्रद्धा ही जीवन की सबसे बड़ी ऊर्जा है। यह भक्ति हमें ईश्वर के निकट लाने का साधन बनती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

तुलसी विवाह का समारोह विशेष रूप से भारतीय पुराणों में वर्णित है, जिसमें तुलसी, जो एक पवित्र पौधा है, का विवाह भगवान श्री कृष्ण के साथ होता है। यह मान्यता है कि तुलसी का पौधा घर में रखने से समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार, तुलसी का विवाह हर वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। मुख्य रूप से यह विवाह राधा-कृष्ण से जुड़ा हुआ है, जो हमें भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। यह समारोह जीवन में प्रेम, भक्ति और समर्पण की भावना को पुनर्जीवित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। तुलसी विवाह मंगलाष्टक का पाठ करने से मानसिक, आध्यात्मिक, और शारीरिक लाभ होते हैं। यह भजन भक्तों के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और आत्म-शांति प्रदान करता है। इसे नियमित रूप से गाने से मन की उलझनें दूर होती हैं और आत्मा को शांति मिलती है। यह प्रेम और समर्पण की भावनाओं को भी बढ़ाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

तुलसी विवाह मंगलाष्टक का पाठ सुबह या शाम के समय करना श्रेष्ठ रहता है। भजन करते समय तुलसी के पौधे के समक्ष दीया जलाना और फूल चढ़ाना चाहिए। भक्त को शांत और स्थिर मुद्रा में बैठे रहना चाहिए, ताकि ध्यान केंद्रित किया जा सके। मन को शांत करके, भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम का अनुभव करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

तुलसी विवाह का महत्व क्या है?

तुलसी विवाह का अर्थ है तुलसी पौधे का भगवान श्री कृष्ण से विवाह। यह भारतीय संस्कृति में प्रेम, समर्पण और पवित्रता का प्रतीक है। इसे प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।

क्या इस भजन का पाठ दैनिक किया जा सकता है?

हाँ, तुलसी विवाह मंगलाष्टक का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और भक्तों का प्रेम एवं भक्ति बढ़ती है।

इस भजन को गाने का सही समय क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह या संध्या के समय करना उचित रहता है। इससे मन को शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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