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108 गणपती महामंत्र : श्री गणेश 108 नामावली (Shri Ganesh Namavali Lyrics in Hindi) - Priya Dhodi Dipesh Dhodi - Bhaktilok

80 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें


108 गणपती महामंत्र : श्री गणेश 108 नामावली (Shri Ganesh Namavali Lyrics in Hindi) - Priya Dhodi Dipesh Dhodi - 

 108 गणपती महामंत्र : श्री गणेश 108 नामावली (Shri Ganesh Namavali Lyrics in Hindi) - 


प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें।

[ श्री गणेश के 108 नाम और उनसे जुड़े मंत्र ]


गजानन- ॐ गजाननाय नमः ।

गणाध्यक्ष- ॐ गणाध्यक्षाय नमः ।

विघ्नराज- ॐ विघ्नराजाय नमः ।

विनायक- ॐ विनायकाय नमः ।

द्वैमातुर- ॐ द्वैमातुराय नमः ।

द्विमुख- ॐ द्विमुखाय नमः ।

प्रमुख- ॐ प्रमुखाय नमः ।

सुमुख-ॐ सुमुखाय नमः ।

कृति- ॐ कृतिने नमः ।

सुप्रदीप- ॐ सुप्रदीपाय नमः ॥ 10 ॥


सुखनिधी- ॐ सुखनिधये नमः ।

सुराध्यक्ष- ॐ सुराध्यक्षाय नमः ।

सुरारिघ्न- ॐ सुरारिघ्नाय नमः ।

महागणपति- ॐ महागणपतये नमः ।

मान्या- ॐ मान्याय नमः ।

महाकाल- ॐ महाकालाय नमः ।

महाबला- ॐ महाबलाय नमः ।

हेरम्ब- ॐ हेरम्बाय नमः ।

लम्बजठर- ॐ लम्बजठरायै नमः ।

ह्रस्वग्रीव- ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः ॥ 20 ॥


महोदरा- ॐ महोदराय नमः ।

मदोत्कट- ॐ मदोत्कटाय नमः ।

महावीर- ॐ महावीराय नमः ।

मन्त्रिणे- ॐ मन्त्रिणे नमः ।

मङ्गल स्वरा- ॐ मङ्गल स्वराय नमः ।

प्रमधा- ॐ प्रमधाय नमः ।

प्रथम- ॐ प्रथमाय नमः ।

प्रज्ञा- ॐ प्राज्ञाय नमः ।

विघ्नकर्ता- ॐ विघ्नकर्त्रे नमः ।

विघ्नहर्ता- ॐ विघ्नहर्त्रे नमः ॥ 30 ॥


विश्वनेत्र- ॐ विश्वनेत्रे नमः ।

विराट्पति- ॐ विराट्पतये नमः ।

श्रीपति- ॐ श्रीपतये नमः ।

वाक्पति- ॐ वाक्पतये नमः ।

शृङ्गारिण- ॐ शृङ्गारिणे नमः ।

अश्रितवत्सल- ॐ अश्रितवत्सलाय नमः ।

शिवप्रिय- ॐ शिवप्रियाय नमः ।

शीघ्रकारिण- ॐ शीघ्रकारिणे नमः ।

शाश्वत - ॐ शाश्वताय नमः ।

बल- ॐ बल नमः ॥ 40 ॥


बलोत्थिताय- ॐ बलोत्थिताय नमः ।

भवात्मजाय- ॐ भवात्मजाय नमः ।

पुराण पुरुष- ॐ पुराण पुरुषाय नमः ।

पूष्णे- ॐ पूष्णे नमः ।

पुष्करोत्षिप्त वारिणे- ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः ।

अग्रगण्याय- ॐ अग्रगण्याय नमः ।

अग्रपूज्याय- ॐ अग्रपूज्याय नमः ।

अग्रगामिने- ॐ अग्रगामिने नमः ।

मन्त्रकृते- ॐ मन्त्रकृते नमः ।

चामीकरप्रभाय- ॐ चामीकरप्रभाय नमः ॥ 50 ॥


सर्वाय- ॐ सर्वाय नमः ।

सर्वोपास्याय- ॐ सर्वोपास्याय नमः ।

सर्व कर्त्रे- ॐ सर्व कर्त्रे नमः ।

सर्वनेत्रे- ॐ सर्वनेत्रे नमः ।

सर्वसिद्धिप्रदाय- ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ।

सिद्धये- ॐ सिद्धये नमः ।

पञ्चहस्ताय- ॐ पञ्चहस्ताय नमः ।

पार्वतीनन्दनाय- ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः ।

प्रभवे- ॐ प्रभवे नमः ।

कुमारगुरवे- ॐ कुमारगुरवे नमः ॥ 60 ॥


अक्षोभ्याय- ॐ अक्षोभ्याय नमः ।

कुञ्जरासुर भञ्जनाय- ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः ।

प्रमोदाय- ॐ प्रमोदाय नमः ।

मोदकप्रियाय- ॐ मोदकप्रियाय नमः ।

कान्तिमते- ॐ कान्तिमते नमः ।

धृतिमते- ॐ धृतिमते नमः ।

कामिने- ॐ कामिने नमः ।

कपित्थपनसप्रियाय- ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः ।

ब्रह्मचारिणे- ॐ ब्रह्मचारिणे नमः ।

ब्रह्मरूपिणे- ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः ॥ 70 ॥


ब्रह्मविद्यादि दानभुवे- ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः ।

जिष्णवे- ॐ जिष्णवे नमः ।

विष्णुप्रियाय- ॐ विष्णुप्रियाय नमः ।

भक्त जीविताय- ॐ भक्त जीविताय नमः ।

जितमन्मधाय- ॐ जितमन्मधाय नमः ।

ऐश्वर्यकारणाय- ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः ।

ज्यायसे- ॐ ज्यायसे नमः ।

यक्षकिन्नेर सेविताय- ॐ यक्षकिन्नेर सेविताय नमः।

गङ्गा सुताय- ॐ गङ्गा सुताय नमः ।

गणाधीशाय- ॐ गणाधीशाय नमः ॥ 80 ॥


गम्भीर निनदाय- ॐ गम्भीर निनदाय नमः ।

वटवे- ॐ वटवे नमः ।

अभीष्टवरदाय- ॐ अभीष्टवरदाय नमः ।

ज्योतिषे- ॐ ज्योतिषे नमः ।

भक्तनिधये- ॐ भक्तनिधये नमः ।

भावगम्याय- ॐ भावगम्याय नमः ।

मङ्गलप्रदाय- ॐ मङ्गलप्रदाय नमः ।

अव्यक्ताय- ॐ अव्यक्ताय नमः ।

अप्राकृत पराक्रमाय- ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः ।

सत्यधर्मिणे- ॐ सत्यधर्मिणे नमः ॥ 90 ॥


सखये- ॐ सखये नमः ।

सरसाम्बुनिधये- ॐ सरसाम्बुनिधये नमः ।

महेशाय- ॐ महेशाय नमः ।

दिव्याङ्गाय- ॐ दिव्याङ्गाय नमः ।

मणिकिङ्किणी मेखालाय- ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः ।

समस्त देवता मूर्तये- ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः ।

सहिष्णवे- ॐ सहिष्णवे नमः ।

सततोत्थिताय- ॐ सततोत्थिताय नमः ।

विघातकारिणे- ॐ विघातकारिणे नमः ।

विश्वग्दृशे- ॐ विश्वग्दृशे नमः ॥ 100 ॥


विश्वरक्षाकृते- ॐ विश्वरक्षाकृते नमः ।

कल्याणगुरवे- ॐ कल्याणगुरवे नमः ।

उन्मत्तवेषाय- ॐ उन्मत्तवेषाय नमः ।

अपराजिते- ॐ अपराजिते नमः ।

समस्त जगदाधाराय- ॐ समस्त जगदाधाराय नमः ।

सर्वैश्वर्यप्रदाय- ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः ।

आक्रान्त चिद चित्प्रभवे- ॐ आक्रान्त चिद चित्प्रभवे नमः ।

श्री विघ्नेश्वराय- ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः ॥ 108 ॥


॥ इति श्रीगणेशाष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ॥



🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का यह भजन "108 गणपती महामंत्र : श्री गणेश 108 नामावली (Shri Ganesh Namavali Lyrics in Hindi) - Priya Dhodi Dipesh Dhodi - Bhaktilok" सभी कार्यों के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना से गाया जाता है। विघ्नहर्ता गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता देव हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में गणेश जी के गजमुख, विशाल उदर, और चूषक वाहन का सुंदर वर्णन है।

इस भजन की मूल भावना विघ्न विनाश और शुभ-लाभ की प्राप्ति की है। जीवन में जब भी कोई नया कार्य प्रारंभ करना हो, तो गणेश जी का स्मरण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे ऋद्धि-सिद्धि के प्रदाता हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश पुराण के अनुसार, श्री गणेश जी की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति का वातावरण बनता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश संकीर्तन से मानसिक अशांति दूर होती है, बुद्धि कुशाग्र होती है और किसी भी कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के सम्मुख दूर्वा और मोदक अर्पित कर इस भजन का संकीर्तन करें। गायन के समय सिंदूर का तिलक लगाना शुभ होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश जी की पूजा में 'दूर्वा' (दूब घास) क्यों चढ़ाई जाती है?

दूर्वा शीतलता प्रदान करने वाली है। अनलासुर नामक दैत्य को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए मुनियों ने उन्हें दूर्वा चढ़ाई थी। तब से गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।

गणेश जी के भजन किस दिन विशेष रूप से गाने चाहिए?

बुधवार का दिन और हर माह आने वाली संकष्टी व विनायक चतुर्थी की तिथियां गणेश आराधना के लिए सर्वोत्तम हैं।

क्या प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण हर पूजा से पहले जरूरी है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव से मिले वरदान के कारण किसी भी शुभ कार्य या देव पूजा की शुरुआत गणेश जी के पूजन व स्मरण से ही की जाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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