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Parvati Stotram

Ambe Asht Bhavani with Lyrics | Alka Yagnik | Ambe Maa Bhajan | Mata Bhajan | Bhawani Maa Bhajan - BhaktiLok

205 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

अम्बे माता जय श्यामा गौरी, तुमको ध्यान धरत है भोरी। अष्टभुजा धारिणी भवानी, तुमको नमस् करत मैं ज्ञानी।। अम्बे माता तुम ही शक्ति हो, ब्रह्मा विष्णु महेश रक्ति हो। दुष्टन को दण्ड देने वाली, सुष्टन को वर देने वाली।। अष्ट भुजा में खड्ग ढाल धरत हो, शूल सायक बाण संधारत हो। घण्टा घोष करत चण्डिका माता, सो नाद रव जग में व्याता।। चामुण्डा रूप धारिणी माता, महिषासुर दलन को दाता। प्रलय काल में भी तुम रहत हो, संहार रूप में विध्वंस करत हो।। भैरव सहित विलास करत हो, महा काली की लीला धरत हो। चिता में बैठी तप करत हो, मुण्डमाल पहन शोभा धरत हो।। कामरूप में रमत प्रमाता, सिद्धि सुख दिहत हैं भगवान माता। अम्बे माता जय श्यामा गौरी, तुमको ध्यान धरत है भोरी।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन माता अम्बे (पार्वती) को समर्पित एक पवित्र स्तुति है जिसमें माता के आठ भुजाओं (अष्टभुजा) का वर्णन किया गया है। भजन में कहा गया है कि माता की सुबह से ही ध्यान किया जाता है क्योंकि वह श्यामा (काली रंगवाली) और गौरी (सुंदर) दोनों ही हैं। अष्टभुजा धारिणी भवानी का अर्थ है कि माता के आठ हाथ हैं जिनमें वह विभिन्न अस्त्र और शस्त्र धारण करती हैं। यह भजन माता की शक्ति (शक्तिदेवी) के रूप में स्वरूप को दर्शाता है। भजन में कहा गया है कि माता ही संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्ति (शक्ति/जीवन) हैं और ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश (शिव) की शक्ति भी माता ही हैं। माता दुष्टों को दंड देने वाली तथा सज्जनों को वर (आशीर्वाद) देने वाली हैं, जो उनकी दैवीय न्याय व्यवस्था को प्रदर्शित करता है।

इस भजन का भावार्थ माता की दिव्य शक्ति और उनके रूद्र रूप को समझने में निहित है। अष्ट भुजाओं में खड्ग (तलवार), ढाल, त्रिशूल, बाण और शंख धारण करने का अर्थ है कि माता शत्रुओं के विनाश के लिए सदैव तैयार रहती हैं। चण्डिका माता का घण्टा घोष करना अर्थात घण्टा बजाना यह दर्शाता है कि माता की दिव्य ध्वनि पूरे ब्रह्मांड में गूंजती है और सभी बुरी शक्तियों को दूर करती है। चामुण्डा रूप में माता का महिषासुर वध करना यह प्रदर्शित करता है कि माता सकल शक्तियों की अधिष्ठात्री हैं। भजन में माता के भैरव के साथ विलास और महाकाली रूप का वर्णन माता की अलौकिकता और परमशक्ति को दर्शाता है। यह संवेदना प्रकट करता है कि माता सभी अवस्थाओं में सर्वव्यापी हैं।

इस भजन की दार्शनिक मीमांसा में माता को परब्रह्म की शक्ति के रूप में स्वीकार किया गया है। भक्ति मार्ग की दृष्टि से यह भजन पूर्ण समर्पण (निष्कामभक्ति) का संदेश देता है। अष्टभुजा का प्रतीकात्मक अर्थ आठ दिशाओं (अष्ट दिशा) पर माता का नियंत्रण दर्शाता है। खड्ग ज्ञान, ढाल सुरक्षा, त्रिशूल काल-कर्म-मृत्यु पर विजय और बाण लक्ष्य भेदन को दर्शाते हैं। माता की पूजा का मुख्य उद्देश्य आत्मशक्ति को जागृत करना है। कामरूप और सिद्धिदायक रूप का वर्णन दर्शाता है कि माता केवल भय और विनाश नहीं बल्कि कल्याण और मुक्ति प्रदान करती हैं। यह भक्ति योग का एक आदर्श मार्ग प्रस्तुत करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन की जड़ें वैदिक काल से जुड़ी हुई हैं जहां माता को अदिति, उषा और रात्रि के रूप में जाना जाता था। दुर्गा सप्तशती और मार्कण्डेय पुराण में माता के अष्टभुजा रूप का विस्तृत वर्णन मिलता है। महाभारत में भी माता की शक्ति और उनके दैवीय अवतारों का उल्लेख है। रामायण में माता सीता के रूप में आदर्श नारीत्व प्रदर्शित करती हैं। हिंदू धर्मशास्त्र में माता की पूजा सृष्टि की उत्पत्ति और संरक्षण के लिए आवश्यक माना जाता है। अष्टमी और नवमी तिथियों पर माता की पूजा विशेष महत्व रखती है। यह भजन तांत्रिक और वैदिक दोनों परंपराओं का समन्वय करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गायन और श्रवण मन में शांति, साहस और दृढ़ता लाता है। माता के ध्यान से मानसिक डर और भय समाप्त होते हैं। शारीरिक रूप से इसके गायन से श्वसन तंत्र और हृदय को शक्ति मिलती है। आध्यात्मिक स्तर पर यह भजन आत्मचेतना को जागृत करता है और सिद्धि प्राप्त कराता है। माता की कृपा से सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता निश्चित होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सर्वश्रेष्ठ समय प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से दो घंटे पहले) है। पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके शुद्ध स्थान पर बैठें। माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करें और फूल, फल, अगरबत्ती अर्पित करें। भजन को श्रद्धा और विनम्रता से गाएं। मन को एकाग्र करते हुए माता के अष्टभुजा रूप का ध्यान करें। नवरात्रि काल में इसका विशेष महत्व है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

अष्टभुजा से माता के किन शक्तियों का बोध होता है?

अष्टभुजा आठ दिशाओं पर माता के नियंत्रण को दर्शाती है। प्रत्येक भुजा में विभिन्न शस्त्र धारण करना माता की सर्वशक्तिमत्ता, ज्ञान, शक्ति, सुरक्षा और विनाश की शक्ति का प्रतीक है। यह माता की सार्वभौमिकता को दर्शाता है।

अल्का यागनिक द्वारा गाया गया यह भजन विशेष क्यों है?

अल्का यागनिक की मधुर और भावपूर्ण गायन शैली इस भजन को जन साधारण तक पहुंचाती है। उनकी संगीत शैली माता की दिव्यता को और गहरा करती है। उनके स्वर में भक्ति और श्रद्धा का संचार श्रोताओं के हृदय को स्पर्श करता है।

महिषासुर वध का माता की पूजा से क्या संबंध है?

महिषासुर वध दुर्गा सप्तशती का मुख्य प्रसंग है जहां माता बुराई और अंधकार का विनाश करती हैं। यह दर्शाता है कि माता सकल नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं। आंतरिक अर्थ में यह मानसिक अशुद्धि और विकारों के विनाश को दर्शाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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