ऋतु अनुसार आयुर्वेदिक सात्विक आहार तालिका
ग्रीष्म ऋतु सात्विक थाली
- ताजे फल, गाय का दूध, देशी घी, मक्खन
- लौकी, कद्दू, तोरई, हरी पत्तेदार सब्जियां
- मूंग दाल, सेंधा नमक, जीरा, सौंफ, मिश्री
- लहसुन, प्याज, मशरूम, कटहल
- बासी भोजन (बनाने के ३ घंटे बाद का भोजन)
- मैदा, तीखे मसाले, शराब, मांसाहार
गाय के दूध में उबला हुआ गेहूं का दलिया व मिश्री। साथ में ताजे मौसमी फल।
लौकी की सब्जी (घी में जीरे से छौंकी हुई), पतली मूंग दाल, गेहूं-बाजरा चपाती व छाछ।
कम तेल-मसाले में पकी ताजी खिचड़ी (देशी गाय के १ चम्मच घी के साथ)। रात ८ बजे से पूर्व शयन अनुकूल।
गीता के १७वें अध्याय में वर्णित त्रिविध आहार
भगवान कृष्ण ने मनुष्य के स्वभाव के आधार पर भोजन को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है:
आयु, बुद्धि, बल, आरोग्य, सुख और प्रीति को बढ़ाने वाले, रसयुक्त, चिकने तथा हृदय को प्रिय लगने वाले स्थिर आहार सात्विक कहलाते हैं। (गीता १७.८)
अति कड़वे, अति खट्टे, अति नमकीन, अति गरम, अति तीखे और जलन पैदा करने वाले दुःख, शोक व रोग उत्पन्न करने वाले आहार राजसिक कहलाते हैं। (गीता १७.९)
जो भोजन आधा पका, रसहीन, दुर्गन्धयुक्त, बासी (३ घंटे पूर्व का) और उच्छिष्ट (जूठा) है, वह भोजन तामसिक कहलाता है जो आलस्य व अज्ञान लाता है। (गीता १७.१०)
३ घंटे का 'प्राण ऊर्जा' नियम
आयुर्वेद के अनुसार पके हुए भोजन में **'प्राण' (Vital Life Force Energy)** विद्यमान होती है। पकाने के ठीक **३ घंटे के भीतर** भोजन का उपभोग कर लेना चाहिए। ३ घंटे बीत जाने पर भोजन में तामसिक तत्वों की वृद्धि होने लगती है और उसकी प्राण ऊर्जा लुप्त हो जाती है।
रेफ्रिजरेटर में रखकर दोबारा गर्म किया गया भोजन 'मृत भोजन' (Dead Food) के समान है, जो शरीर में विषाक्त पदार्थों (Amas) का संचय कर बीमारियों को बुलावा देता है। अतः सदैव ताजा व गर्म भोजन ही ग्रहण करें।
सात्विक आहार संबंधी शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
आयुर्वेदिक पोषण व सात्विक संकलन
भक्तिलोक सात्विक परिषद् (Bhaktilok Satvik Council)
श्रीमद्भगवद्गीता के सत्रहवें अध्याय के सात्विक आहार सूत्रों का संकलन करने वाली पोषण वैज्ञानिक मंडली।
वैदिक समीक्षा व तथ्य-जांच
डॉ. हरिशंकर व्यास (Dr. Harishankar Vyas)
आयुर्वेद ग्रंथ समीक्षक व संस्कृत ग्रंथाचार्य। २५+ वर्षों का आयुर्वेदिक संहिता पठन व समीक्षा अनुभव।
सात्विक आहार नियम सत्यापित