पवित्र पर्वत माहात्म्य व परिक्रमा विनिर्देशन
कैलाश पर्वत
| १. भौगोलिक स्थान व ऊंचाई (Location & Height): | तिब्बत हिमालय | २१,७७८ फीट |
| २. पौराणिक माहात्म्य व इतिहास (Legend): | 0 |
| ३. परिक्रमा दूरी व कठिनता नियम (Circumambulation): | 0 |
| विशेष गिरिराज निर्देश: 0 | |
पवित्र पर्वतों के असाधारण चुंबकीय व ऊर्जा वलय का विज्ञान
सनातन काल से ऋषि-मुनि इन पर्वतों पर ही तपस्या क्यों करते आ रहे हैं? आधुनिक विज्ञान इसके निम्नलिखित कारण बताता है:
रूसी वैज्ञानिकों और खगोल भौतिकविदों के शोध के अनुसार, **कैलाश पर्वत** पृथ्वी का केंद्र बिंदु यानी **'एक्सिस मुंडी'** (Axis Mundi) है। यह पृथ्वी के चुंबकीय और भौगोलिक ध्रुवों का मुख्य संधि स्थल है, जहाँ ब्रह्मांडीय तरंगे संघनित होती हैं। यहाँ पर समय के प्रवाह की गति (Time dilation) भी सामान्य स्थानों से थोड़ी भिन्न पाई गई है।
गोवर्धन पर्वत और अरुणाचल पर्वत जैसे ग्रेनाइट-युक्त पहाड़ों के इर्द-गिर्द परिक्रमा पथ में तीव्र **जियोमैग्नेटिक क्षेत्र** (Geomagnetic fields) पाया जाता है। नंगे पैर गिरिराज परिक्रमा करने से पैरों के एक्यूप्रेशर बिंदु दबते हैं जिससे शरीर का तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है और मस्तिष्क शांत होता है।
पवित्र पर्वत शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
पौराणिक भूगोल व गिरी माहात्म्य संपादन
भक्तिलोक पौराणिक भूगोल प्रभाग (Bhaktilok Mountain Desk)
शिव पुराण, स्कन्द पुराण (गिरिराज महिमा) और ब्रह्माण्ड पुराण के पर्वत भौगोलिक विवरणों के नियमों के अनुसार सूची संकलन करने वाली विंग।
गिरिराज परिक्रमा व योग समीक्षा
स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती (Swami Chinmayanand Saraswati)
अधिष्ठाता, ऋषिकेश गिरिराज साधना आश्रम। ३६+ वर्षों का हिमालयी क्षेत्र साधना, गोवर्धन कल्प व पर्वत योग समीक्षा अनुभव।
गिरी विवरण सत्यापित