षोडशोपचार १६ चरण कार्ड स्लाइडर
१. ध्यानावहन
| ॐ ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं... | |
| १. मन्त्र हिन्दी अर्थ (Translation): | 0 |
| २. शारीरिक क्रिया व विधि (Method): | 0 |
| शास्त्र सम्मत टिप: 0 | |
ऋग्वेद पुरुष सूक्त और षोडशोपचार का अंतर्संबंध
ऋग्वेद के १०वें मण्डल का **'पुरुष सूक्त' (Purusha Sukta)** ब्रह्मांड की उत्पत्ति का वर्णन करता है। इसमें कुल १६ ऋचाएं (श्लोक) हैं। षोडशोपचार के १६ चरणों का प्रत्येक चरण पुरुष सूक्त की एक-एक ऋचा से सीधे जुड़ा हुआ है:
पुरुष सूक्त के अनुसार विराट पुरुष (परमेश्वर) ने अपने ही शरीर की आहुति देकर इस ब्रह्मांड का निर्माण किया। जब हम विग्रह को १६ चरणों से पूजते हैं, तो हम उसी ब्रह्मांडीय 'सृष्टि यज्ञ' को अपने पूजा घर में छोटे रूप (microcosm) में पुनर्जीवित करते हैं जिससे घर की ऊर्जा संतुलित होती है।
१६ मन्त्रों के क्रमिक गुंजन से निकलने वाली ध्वनि तरंगे धातु या पाषाण (पत्थर) के विग्रह के परमाणुओं को स्पंदित करती हैं, जिससे वह निर्जीव प्रतिमा साक्षात दिव्य तरंगों को प्रसारित करने वाली चैतन्य महाशक्ति (Antenna) में परिवर्तित हो जाती है।
षोडशोपचार शंका समाधान (FAQs)
१. पयः स्नान: सबसे पहले गाय का कच्चा दूध चढ़ाएं।
२. दधि स्नान: दही अर्पित करें।
३. घृत स्नान: गाय का शुद्ध घी चढ़ाएं।
४. मधु स्नान: शुद्ध शहद अर्पित करें।
५. शर्करा स्नान: शक्कर/मिश्री घोल चढ़ाएं।
अंत में, विग्रह को शुद्ध गंगाजल या ताजे जल (शुद्धोदक स्नान) से स्नान कराकर साफ सूती कपड़े से पोछें।
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
कर्मकांड व वैदिक सूक्त संपादन
भक्तिलोक कर्मकांड शास्त्र प्रभाग (Bhaktilok Vedic Desk)
ऋग्वेद संहिता, पारस्कर गृह्यसूत्र और संस्कार गणपति के पूजा अध्यायों के मन्त्रों के अनुसार षोडशोपचार संकलन करने वाली विंग।
यज्ञ व विग्रह पूजन समीक्षा
पं. वासुदेव नारायण अग्निहोत्री (Pt. Vasudev Narayan Agnihotri)
वरिष्ठ यज्ञाचार्य, वैदिक शोध संस्थान, प्रयागराज। ३२+ वर्षों का सोमयज्ञ, षोडशोपचार पद्धति व वेद पाठ शुद्धि समीक्षा अनुभव।
पूजा विधि सत्यापित