आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
काल ज्ञान

पूजा समय अनुस्मारक

"कालो हि बलवान्" – समय ही बलवान है। वैदिक पंचांग के अनुसार, २४ घंटों की अवधि को ३० मुहूर्त (प्रत्येक ४८ मिनट) में विभाजित किया गया है। प्रातः सूर्योदय और सायंकाल सूर्यास्त के समय हमारे प्राण (ऊर्जा प्रवाह) की इड़ा और पिंगला नाड़ियों में संधि होती है, जिसे 'संध्या काल' कहा जाता है। अपने स्थानीय सूर्योदय के अनुसार पंचांग संधिकाल समयों की गणना करें और दैनिक आरती व संध्यावंदन का अनुस्मारक (Reminder Alarm) प्राप्त करें।

विधा: मुहूर्त्त व संधिकाल पंचांग सूत्र: सूर्योदय आधारित गणना

सूर्योदय आधारित दैनिक संधिकाल मुहूर्त्त गणक

दैनिक पूजा व आरती समय सारिणी:

संधिकाल / पूजा गणना समय खिड़की वैज्ञानिक महत्व अलार्म सहेजें

वैदिक पंचांग काल का गणितीय विभाजन

प्राचीन ऋषियों ने समय मापन के लिए अत्यंत परिष्कृत (precise) इकाइयों की रचना की थी:

घाटी व विघटी (Ghati & Vighati)

१ दिन-रात (२४ घंटे) = ६० घाटी।
१ घाटी = २४ मिनट।
१ विघटी = २४ सेकंड।
इस गणितीय विभाजन के अनुसार, संध्यावंदन का समय प्रातः और सायं संधिकाल पर ठीक २ घाटी (४८ मिनट) का निर्धारित किया गया है, जो प्रकृति में ऊर्जा परिवर्तन का सूचक है।

मुहूर्त्त का अर्थ (Muhurta = 48 Minutes)

१ दिन-रात में कुल ३० मुहूर्त होते हैं। प्रत्येक मुहूर्त २ घाटी (४८ मिनट) का होता है। सूर्योदय से ठीक २ मुहूर्त पहले (९६ मिनट पूर्व) **'ब्रह्ममुहूर्त'** प्रारंभ होता है। इस काल में वायुमंडल में ओजोन गैस (O3) की मात्रा सर्वाधिक होती है जो प्राणशक्ति बढ़ाती है।

पूजा समय पंचांग शंका समाधान (FAQs)

ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से ९६ मिनट पूर्व) के समय वातावरण बिल्कुल शांत होता है और कॉस्मिक तरंगे तीव्र होती हैं। इस समय उठने से हमारे मस्तिष्क में **मेलाटोनिन और सेरोटोनिन** हार्मोन का संतुलन बेहतर होता है, जिससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक कार्यक्षमता सामान्य दिनों की तुलना में १० गुना अधिक पाई जाती है।

संध्याकाल (गोधूलि वेला) का सही समय **सूर्यास्त से २४ मिनट पहले और सूर्यास्त के २४ मिनट बाद** (कुल ४८ मिनट) का संधिकाल होता है। इस समय दिन प्रकाश से अंधकार की ओर परिवर्तित होता है। इस काल में घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाने से घर में दरिद्रता का प्रवेश नहीं होता और मानसिक भय दूर होता है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

पंचांग गणित व काल गणना संपादन

भक्तिलोक पंचांग काल अनुसंधान विभाग (Bhaktilok Time Math Wing)

सूर्य सिद्धांत और सिद्धांत शिरोमणि के ग्रह गतियों के समय मापदंडों के अनुसार पंचांग गणनाएं करने वाली विंग।

मुहूर्त्त व संधिकाल समीक्षा

पं. मदनमोहन पाठक (Pt. Madanmohan Pathak)

प्रधान ज्योतिषाचार्य, काशी पंचांग सभा। ३१+ वर्षों का ग्रहण वेध, ग्रह गोचर व मुहूर्त्त संधिकाल शुद्धि समीक्षा अनुभव।

समय सारिणी सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें