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पुष्प ऋतु चक्र

पूजन पुष्प ऋतु चक्र कैलेंडर

"पुष्पं समर्पयामि" – सनातन शास्त्रों में पुष्प अर्पण को पंचोपचार पूजा का मुख्य अंग माना गया है। पुष्प आकाश तत्व और वायु तत्व के सात्विक कम्पन ग्रहण कर भगवान की प्रतिमा पर प्रेषित करते हैं। पुष्पों की उपलब्धता विभिन्न ऋतुओं (वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद व शिशिर) पर निर्भर करती है। हमारे ऋतु चक्र कैलेंडर से यह जानें कि किस ऋतु में कौन से पवित्र पुष्प खिलते हैं और उनके शास्त्रीय अर्पण विधान क्या हैं।

विधा: पुष्प चिकित्सा व अर्पण नियम: प्राकृतिक ऋतु चक्र सम्मत

ऋतु अनुसार उपलब्ध पुष्प व विनिर्देशन

वसंत ऋतु पुष्प

१. उपलब्ध मुख्य पुष्प (Available Flowers):गेंदा, पलाश, गुलाब, चमेली।
२. प्रिय देव व पूजा पर्व (Occasions & Deities):0
३. शास्त्रों के अर्पण नियम (Offering Rules):0
विशेष पुष्प शास्त्र निर्देश: 0

पुष्प चुनने, तोड़ने व चढ़ाने के शास्त्रीय नियम

देवताओं को अर्पित किए जाने वाले पुष्पों की पवित्रता बनाए रखने के लिए शास्त्रों में इन नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है:

फूल तोड़ने की वर्जित तिथियां (Forbidden Plucking Days)

शास्त्रों के अनुसार, **चतुर्थी, अष्टमी, एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति** और **रविवार** के दिन तुलसी पत्र, बिल्वपत्र या देवताओं के फूलों को तोड़ना वर्जित माना गया है। इन दिनों पूजा हेतु एक दिन पूर्व ही फूल तोड़कर सुरक्षित रख लेना चाहिए।

अग्राह्य व दूषित पुष्प (Impure Flowers)

१. जमीन पर गिरे हुए फूल (सिवाय पारिजात के), २. किसी के द्वारा सूंघे गए फूल, ३. कीड़े लगे या सड़े हुए फूल, ४. बाएं हाथ से तोड़े गए फूल, ५. प्लास्टिक या धातु के कृत्रिम फूल। इन सभी प्रकार के फूलों को विग्रह पर चढ़ाना पूर्णतः वर्जित है।

पुष्प अर्पण शंका समाधान (FAQs)

सामान्य नियम के अनुसार देवताओं को केवल ताजे तोड़े गए फूल ही चढ़ाने चाहिए। परन्तु शास्त्रों में इसके कुछ अपवाद हैं:
१. कमल का फूल (Lotus): इसे तीन दिनों तक बासी नहीं माना जाता और धोकर पुनः चढ़ाया जा सकता है।
२. बिल्वपत्र (Bael leaves) व तुलसीदल (Tulsi): ये कभी बासी नहीं होते। इन्हें धोकर बार-बार अर्पित किया जा सकता है।
३. चम्पा व पारिजात: इन्हें एक दिन पूर्व तोड़ा हुआ भी चढ़ाया जा सकता है।

सभी फूलों के लिए नियम है कि उन्हें पेड़ से तोड़कर ही चढ़ाया जाए और जमीन पर गिरे फूल अपवित्र होते हैं। परन्तु **पारिजात (हरसिंगार)** एकमात्र ऐसा दिव्य पुष्प है जो भगवान इंद्र के स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आया है। यह फूल स्वतः डाली से टूटकर जमीन पर गिरता है और इसके जमीन पर गिरने के बाद ही उठाकर लक्ष्मी जी व भगवान विष्णु को चढ़ाना परम पुण्यकारी माना जाता है। इसे डाली से तोड़ना निषेध है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

वनस्पति व पुष्प शास्त्र संपादन

भक्तिलोक पुष्प विधि प्रभाग (Bhaktilok Pushpa Shastra Desk)

पद्म पुराण, शिव पुराण और वनस्पति कोश के सूत्रों के अनुसार ऋतु अनुसार पुष्प उपलब्धता संकलन करने वाली विंग।

वैदिक पुष्प अर्पण समीक्षा

आचार्य रमाकान्त शुक्ल (Acharya Ramakant Shukla)

संयोजक, श्री काशी विश्वानाथ पुष्प सेवा संघ। ३३+ वर्षों का शिव मन्दार अर्पण व देव पुष्प शुद्धि समीक्षा अनुभव।

पुष्प कैलेंडर सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें