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सात्विक गृह सज्जा

पूजा गृह सजावट नियोजक

वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा घर वह स्थान है जहां से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा (प्राण ऊर्जा) का संचार होता है। त्यौहारों पर की जाने वाली सजावट में रासायनिक रंगों, प्लास्टिक के पत्तों या कृत्रिम सुगंधों का उपयोग करने से घर की सात्विक ऊर्जा प्रदूषित होती है। ताजे गेंदा पुष्प, आम तोरण, गोबर की लिपाई, पीतल के पात्र और मिट्टी के दीपकों का सही संरेखण वास्तु के अनुरूप दैवीय स्पंदन को चरम पर ले जाता है।

विधा: वास्तु व पर्यावरण हितैषी कला नियम: ताजे प्राकृतिक पुष्प तोरण

उत्सव मण्डप सज्जा विनिर्देशन

दीपावली लक्ष्मी वेदी

१. प्राकृतिक सात्विक सामग्रियां (Materials):गेंदे के ताजे फूल, आम के पत्ते, मिट्टी के दीये, कुमकुम रंगोली।
२. सर्वश्रेष्ठ वास्तु दिशा (Vastu Direction):उत्तर-पूर्व (ईशान कोण)।
३. मण्डप संरचना व सज्जा विधि (Setup Guide):0
वास्तु सजावट सूत्र: 0

वेदी और मण्डप स्थापना के ३ अनिवार्य वास्तु नियम

सजावट शुरू करने से पहले भगवान की चौकी स्थापित करते समय निम्नलिखित वास्तु नियमों का विशेष ध्यान रखें:

ईशान कोण और दिशा संरेखण (North-East Altar Direction)

पूजा घर हमेशा घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होना चाहिए, क्योंकि इस दिशा से दिव्य ब्रह्मांडीय तरंगें प्रवेश करती हैं। पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए, जिससे मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है।

अखंड ज्योति व कलश की स्थिति (Placement of Akhand Diya & Kalash)

अखंड ज्योति अथवा बड़े दीपक को हमेशा वेदी के दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) दिशा में रखना चाहिए क्योंकि यह अग्नि देव की दिशा है। कलश और जल पात्र को वेदी के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या उत्तर दिशा में स्थापित करना चाहिए जो जल तत्व की दिशा है।

पूजा सजावट शंका समाधान (FAQs)

नहीं। शास्त्रों और वास्तु के अनुसार, प्लास्टिक या कृत्रिम फूल 'निर्जीव' वस्तुएं हैं, जिनमें प्राण ऊर्जा का अभाव होता है और वे धूल जमा करती हैं। यह घर में सुस्ती लाती हैं। इसके विपरीत, ताजे फूल और आम/अशोक के पत्ते वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाते हैं और अपनी खुशबू से नकारात्मक ऊर्जा का नाश करते हैं। अतः तोरण में ताजे पत्तों और गेंदे के फूलों का ही प्रयोग करें।

पूजा घर में हमेशा प्राकृतिक सामग्रियों जैसे **सूखा सिन्दूर (कुमकुम), हल्दी, चावल का आटा और ताजे फूलों** की रंगोली बनानी चाहिए। रसायनों वाले सिंथेटिक रंगोली रंगों का प्रयोग न करें। रंगोली में स्वास्तिक, ॐ, कमल का फूल, श्री-यंत्र या देवी के चरणों की आकृतियाँ बनाना अत्यंत शुभ और लक्ष्मी को आकर्षित करने वाला माना जाता है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

वास्तु व शिल्प शास्त्र संपादन

भक्तिलोक वास्तु शोध प्रभाग (Bhaktilok Vastu Desk)

समरांगण सूत्रधार, मयमतम् और विश्वकर्मा प्रकाश ग्रन्थों के स्थापत्य सूत्रों के अनुसार दिशा व वेदी निर्माण व्याख्या करने वाली विंग।

गृह मण्डप व शिल्प समीक्षा

आचार्य रामनरेश त्रिपाठी (Acharya Ramnaresh Tripathi)

महानिदेशक, काशी वास्तु सभा, वाराणसी। ३१+ वर्षों का पारम्परिक देव विग्रह सज्जा व मण्डप भू-संरेखण समीक्षा अनुभव।

सज्जा नियम सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें