प्रसादम अनुपात गणना इंजन
आवश्यक सात्विक सामग्री मात्रा:
| सामग्री (Ingredient Name) | आवश्यक मात्रा (Required Quantity) | शास्त्रीय उपयोग विवरण (Scriptural Use) |
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सात्विक पाकशाला एवं शुद्धि के मूल वैदिक सिद्धांत
देवताओं को अर्पित किए जाने वाले महाप्रसाद के निर्माण हेतु रसोई घर में इन शुद्धताओं का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है:
भोजन बनाते समय कभी भी सांसारिक व्यर्थ की बातें या क्रोध नहीं करना चाहिए, क्योंकि पकाने वाले की भावनाएं और कम्पन (Vibrations) सीधे अन्न में प्रवेश करते हैं। सात्विक प्रसाद बनाते समय मौन रहें अथवा मन ही मन **"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"** या गायत्री मंत्र का जाप करते रहें।
जब तक प्रसाद भगवान को अर्पित न कर दिया जाए, तब तक उसे चखना (taste करना) महापाप माना गया है, इससे अन्न झूठा हो जाता है। नमक, शक्कर अथवा घी का सही अनुपात मापने के लिए इस कैलकुलेटर के सटीक मात्रा निर्देशों का ही उपयोग करें।
प्रसादम पाकशास्त्र शंका समाधान (FAQs)
१. दही (Curd): पंचामृत का आधार (सदा सुख शांति व स्थिरता का प्रतीक)।
२. कच्चा दूध (Milk): (पवित्रता व दीर्घायु का प्रतीक)।
३. शहद (Honey): (मधुर वाणी व एकता का प्रतीक)।
४. देसी घी (Ghee): (तेज व शारीरिक बल का प्रतीक)।
५. मिश्री / चीनी (Sugar): (जीवन में मिठास का प्रतीक)।
शास्त्रों के अनुसार दही की मात्रा सबसे अधिक होती है, उसके बाद दूध, फिर क्रमशः घी, शहद और मिश्री की मात्रा न्यूनतम होती है।
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
सात्विक पाकशास्त्र व नैवेद्य संपादन
भक्तिलोक प्रसादम प्रभाग (Bhaktilok Prasadam Wing)
वराह पुराण, सुश्रुत संहिता और पाकदर्पण ग्रन्थ के सात्विक भोजन माप विधानों के अनुसार अनुपात संकलन करने वाली विंग।
भंडारा व पाक शुद्धि समीक्षा
आचार्य गोपीनाथ महाराज (Acharya Gopinath Maharaj)
संयोजक, श्री बांके बिहारी भोग शाला, वृन्दावन। ३०+ वर्षों का छप्पन भोग व सात्विक प्रसाद निर्माण अनुपात समीक्षा अनुभव।
प्रसादम अनुपात सत्यापित