शिशु विवरण व ज्योतिष नामाक्षर गणक
ज्योतिष सम्मत अनुशंसा रिपोर्ट:
| १. अनुशंसित नामकरण तिथि (Recommended Date): | 0 (जन्म के 11वें या 12वें दिन) |
| २. नक्षत्र नामाक्षर वर्ण (Recommended Letters): | 0 |
| ३. राशि स्वामी व तत्व (Rashi Lord & Element): | 0 |
| विशेष शास्त्र निर्देश: 0 | |
नामकरण संस्कार आवश्यक सामग्री चेकलिस्ट
नामकरण संस्कार के ३ शास्त्रीय नियम
शिशु का नामकरण करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन सुनिश्चित करें:
मनुस्मृति और गृह्यसूत्रों के अनुसार, प्रसूति (सूतक) काल की समाप्ति के बाद शिशु का नामकरण **जन्म के 11वें या 12वें दिन** किया जाना चाहिए। इस दिन सूतक निवृत्त होता है और नवजात की त्वचा व फेफड़े बाहरी वायुमंडल के यज्ञीय धुएं को सहन करने हेतु सक्षम हो जाते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, बालकों का नाम हमेशा **सम संख्या (Even number)** के अक्षरों वाला (जैसे २ या ४ अक्षरों का - राम, देव, नारायण) होना चाहिए। बालिकाओं का नाम हमेशा **विषम संख्या (Odd number)** के अक्षरों वाला (जैसे ३ या ५ अक्षरों का - शारदा, गायत्री, अनुसूया) होना चाहिए जो सौभाग्य लाता है।
नामकरण शंका समाधान (FAQs)
२. पुकारने का नाम (व्यवहारिक नाम): यह समाज में व्यवहार के लिए रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार व्यावहारिक नाम भी सात्विक होना चाहिए, किसी अपवित्र या हास्यास्पद शब्द पर नहीं।
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
संस्कार व गृह्य सूत्र संपादन
भक्तिलोक षोडश संस्कार शोध प्रभाग (Bhaktilok Sanskar Wing)
पारस्कर गृह्यसूत्र, मनुस्मृति और गोभिल गृह्यसूत्र के नामकरण अध्यायों के सूत्रों के अनुसार तिथियां व नियम संकलन करने वाली विंग।
मुहूर्त्त व ज्योतिषीय समीक्षा
आचार्य वशिष्ठ नारायण मिश्र (Acharya Vashishta Narayan Mishra)
कुलपति, मिथिला संस्कृत ज्योतिष विद्यापीठ। ३५+ वर्षों का बाल कुंडली निर्माण, नक्षत्र नामकरण व संस्कार काल समीक्षा अनुभव।
गणना सूत्र सत्यापित