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शतनामावली

अष्टोत्तर शतनामावली खोजक

सनातन उपासना में देवी-देवताओं के नामों का जप करना ध्यान और मन की शुद्धि का परम साधन है। 'अष्टोत्तर शतनामावली' का अर्थ है - १०८ नाम। उपनिषदों के अनुसार, सृष्टि के १०८ भौतिक और सूक्ष्म आयामों के अनुकूल इन दिव्य नामों की रचना की गई है। शिव, गणेश, कृष्ण और माता दुर्गा के १०८ नामों की शब्दार्थ सहित विस्तृत व्याख्या प्राप्त करें।

विधा: नामावली व नाम अर्थ संख्या: १०८ पवित्र नामावली

अष्टोत्तर शतनामावली अन्वेषण

श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली:

शतनामावली पाठ करने के ५ शास्त्रीय नियम

देवताओं के नाम जप का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु शास्त्रों में बताए गए इन विधानों का पालन करें:

चतुर्थी विभक्ति व 'ॐ नमः' संपुट

जब भी नामों का हवन या अर्पण किया जाता है, तो नाम को चतुर्थी विभक्ति में बोलना चाहिए। जैसे 'गणपति' नाम को **"ॐ गणपतये नमः"** कहकर अक्षत, दूर्वा या पुष्प अर्पित करना चाहिए। केवल नाम बोलने से अधिक प्रभावी मन्त्र स्वरूप है।

जप संख्या १०८ का वैज्ञानिक रहस्य

ब्रह्मांड में सूर्य की दूरी पृथ्वी के व्यास की १०८ गुना है। हमारे शरीर में ७२,००० नाड़ियाँ हैं जिनमें से मुख्य १०८ नाड़ियों का जंक्शन हृदय चक्र (Heart Chakra) पर होता है। १०८ बार जप करने से नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं।

शतनामावली शंका समाधान (FAQs)

हाँ, बीज मंत्रों (जैसे ऐं, ह्रीं, क्लीं) के जप के लिए दीक्षा आवश्यक मानी जाती है क्योंकि वे उग्र शक्तियाँ हैं। परन्तु भगवान के नामों (अष्टोत्तर शतनामावली) और स्तोत्रों के जप के लिए किसी दीक्षा की आवश्यकता नहीं होती। नाम जप अत्यंत सौम्य और कल्याणकारी होता है, इसे कोई भी जातक शुद्ध मन से कर सकता है।

जब आप यज्ञ या हवन कुंड में आहुति दे रहे हों, तो प्रत्येक नाम के आगे 'ॐ' और अंत में 'नमः स्वाहा' बोलना चाहिए (जैसे "ॐ बालप्रदाय नमः स्वाहा") और दाहिने हाथ की अनामिका व अंगूठे से आहुति छोड़नी चाहिए। यदि घर के मंदिर में प्रतिमा पर पुष्प या कुमकुम अर्पित कर रहे हों, तो स्वाहा के स्थान पर 'नमः' बोलें।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

ग्रन्थ नाम कोश संपादन

भक्तिलोक नाम कोश पीठ (Bhaktilok Nomological Desk)

पद्म पुराण, शिवरहस्य और देवीभागवत पुराण के सहस्रनामों से १०८ प्रमुख नाम संकलन करने वाली विंग।

वैदिक नामावली व विग्रह समीक्षा

पं. रामेश्वरानन्द शास्त्री (Pt. Rameshwaranand Shastri)

पूर्व अध्यक्ष, नाम-जप परिषद, अयोध्या। ३१+ वर्षों का वैष्णव व शैव नामावली व्याख्या व मन्त्र शुद्धि समीक्षा अनुभव।

नामावली अर्थ सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें