श्वास ध्यान क्लॉक
आपकी साधना डायरी (Meditation Journal)
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प्राणायाम और मानसिक स्वास्थ्य का विज्ञान
पतंजलि अष्टांग योग के चतुर्थ अंग **प्राणायाम** के अनुसार श्वास की गति को नियंत्रित करना सीधे मन को वश में करने की कुंजी है (चले वाते चलं चित्तं)। विज्ञान भी यह प्रमाणित करता है कि जब हम समवृत्ति प्राणायाम (4 सेकंड श्वास लेना, 4 रोकना, 4 छोड़ना) करते हैं, तो यह हमारे स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) को तुरंत क्रियाशील करता है।
अल्फा व थीटा मस्तिष्क तरंगें (Alpha/Theta Waves): गहन श्वास और ध्यान की अवस्था में मस्तिष्क में तनाव पैदा करने वाली बीटा तरंगों का प्रभाव घट जाता है तथा रचनात्मकता व आंतरिक शांति देने वाली **अल्फा तरंगें (8-12 Hz)** जाग्रत होती हैं। नियमित १० मिनट का ध्यान उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक है।
ॐ (Aum) ध्वनि तरंगों का महत्व
ॐ ब्रह्मांड का आदिकाल नाद (Cosmic Sound) है। वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि 'ॐ' का लंबा उच्चारण करने से गले और कपाल में सूक्ष्म कंपन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं। यह कंपन वेगस तंत्रिका (Vagus Nerve) को उत्तेजित करता है, जिससे हृदय गति संतुलित होती है और शरीर में तनावरोधी रसायनों का स्राव होता है।
ध्यान साधना संबंधी सामान्य शंकाएं (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
ध्यान योग व श्वास विज्ञान संकलन
भक्तिलोक पतंजलि साधना पीठ (Bhaktilok Patanjali Sadhana Peeth)
हठयोग प्रदीपिका तथा पतंजलि अष्टांग योग के प्राणायाम सिद्धांतों का संकलन करने वाली योग वैज्ञानिक परिषद्।
स्वास्थ्य व मानसिक समीक्षा
योगाचार्य रामशरण देव (Yogacharya Ramsharan Dev)
वरिष्ठ योग शिक्षक व प्राण चिकित्सा विशेषज्ञ। २०+ वर्षों का ध्यान योग अध्यापन।
योगिक क्रियाएं परीक्षित