वैदिक मंत्र अनुवादक
गायत्री महामंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
| संस्कृत शब्द | हिन्दी अनुवाद (Literal Meaning) |
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मंत्र जाप के ५ शास्त्रीय व वैज्ञानिक नियम
मंत्रों का सही फल प्राप्त करने के लिए उच्चारण शुद्धि और आसन के नियमों का पालन करना परम आवश्यक है:
जाप करते समय कभी भी नग्न भूमि (जमीन) पर न बैठें। भूमि पर बैठने से जाप की विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा पृथ्वी में समाहित हो जाती है। कुशा (घास) का आसन अथवा ऊनी कंबल का आसन सर्वोत्तम कुचालक माना गया है।
मंत्र का एक-एक अक्षर शुद्ध स्वर (ह्रस्व व दीर्घ) में बोलना चाहिए। अशुद्ध उच्चारण से विपरीत परिणाम भी आ सकते हैं। यदि संस्कृत कठिन हो, तो उपांशु जाप (होठ हिलाना) अथवा मानसिक जाप करना सुरक्षित है।
मंत्र साधना शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
संस्कृत व्याकरण व भाषिकी संपादन
भक्तिलोक वैदिक व्याकरण पीठ (Bhaktilok Sanskrit Wing)
निरुक्त, पाणिनि व्याकरण और वेद भाष्यों के आधार पर शब्दशः अनुवाद व निरुक्त व्याख्याएं करने वाली विंग।
शास्त्र व वेद मन्त्र समीक्षा
आचार्य रामगोपाल त्रिपाठी (Acharya Ramgopal Tripathi)
वरिष्ठ व्याख्याता, वेद विभाग, गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार। ३२+ वर्षों का वेद संहिता अध्यापन व संस्कृत मंत्र शुद्धि समीक्षा अनुभव।
मंत्र अनुवाद सत्यापित