त्यौहार ऐतिहासिक व खगोलीय विनिर्देशन
दीपावली (Diwali)
| १. खगोलीय काल (Astronomical Tithi): | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि। |
| २. पौराणिक इतिहास (Scriptural History): | 0 |
| ३. वैज्ञानिक / शारीरिक महत्व: | 0 |
| विशेष शास्त्र टिप: 0 | |
सनातन त्यौहारों के ३ वैज्ञानिक व प्राकृतिक आधार
सनातन पर्वों की रचना प्राकृतिक परिवर्तनों और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह को ध्यान में रखकर की गई है:
नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है - चैत्र (गर्मी की शुरुआत) और अश्विन (सर्दी की शुरुआत)। यह ऋतु संधिकाल है जब मानव शरीर की जठराग्नि कमजोर होती है और बीमारियां बढ़ती हैं। इन ९ दिनों में व्रत (हल्का भोजन) रखने से शरीर का प्राकृतिक रूप से डिटॉक्सिफिकेशन हो जाता है।
मकर संक्रांति सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (उत्तरायण प्रारंभ) को दर्शाती है। उत्तरायण काल में उत्तरी गोलार्ध में धूप अधिक प्रखर होती है, जिससे फसलों में ऊर्जा बढ़ती है और मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
त्यौहार विज्ञान शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
त्यौहार विज्ञान व ग्रन्थ संपादन
भक्तिलोक पर्व विमर्श पीठ (Bhaktilok Festival Desk)
पद्म पुराण, हेमाद्रि व्रतराज और निर्णयसिंधु ग्रंथों के त्यौहार मुहूर्त नियमों के अनुसार व्याख्या करने वाली विंग।
कर्मकांड व पौराणिक इतिहास समीक्षा
पं. विद्याधर शास्त्री (Pt. Vidyadhar Shastri)
पूर्व प्राध्यापक, सनातन संस्कृति संकाय, गुरुकुल कांगड़ी। २८+ वर्षों का पौराणिक तिथि शास्त्र व्याख्या समीक्षा अनुभव।
त्यौहार कथाएं सत्यापित