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पुष्प समर्पण

पुष्प अर्पण मार्गदर्शिका

सनातन पूजा पद्धति में फूलों और पत्तियों का दान प्रत्यक्ष देव साधना का प्रमुख अंग है। प्रत्येक पुष्प की अपनी गंध, वर्ण (रंग) और आध्यात्मिक गुण होते हैं। शिव महापुराण और देवी भागवत के अनुसार, जहाँ कुछ फूल देवी-देवताओं को अत्यंत प्रिय हैं, वहीं कुछ पुष्प सर्वथा वर्जित माने गए हैं। शास्त्रोक्त प्रिय व वर्जित फूलों की सूची जानें।

विषय: पुष्प व पत्र शुद्धि स्रोत: शिव पुराण व आगम शास्त्र

देव-पुष्प शास्त्रीय डेटाबेस

भगवान शिव (Lord Shiva)

प्रिय पुष्प व पत्र: धतूरे के फूल, मदार (आक), बेलपत्र, शमी पत्र और शंखपुष्पी।
वर्जित पुष्प व पत्र: केतकी और चम्पा के पुष्प। शिव पूजा में तुलसी दल चढ़ाना वर्जित है।
शास्त्रीय आख्यान व रहस्य: ब्रह्मा जी के झूठ में साथ देने के कारण शिवजी ने केतकी पुष्प को शाप दिया था कि वह कभी शिव पूजा में नहीं चढ़ेगा।

पुष्प तोड़ने व देव अर्पण के ५ शास्त्रीय नियम

देवताओं को फूल चढ़ाते समय श्रद्धा के साथ-साथ शुद्धता के नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

सूर्यास्त के बाद फूल न तोड़ें

शास्त्रों के अनुसार सूर्यास्त के बाद पेड़-पौधे सो जाते हैं। इसलिए संध्या काल के उपरांत कभी भी पूजा के लिए फूल या पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए।

गिरे हुए व बासी फूलों का निषेध

जमीन पर खुद गिरे हुए फूलों को कभी भी धोकर भगवान पर नहीं चढ़ाना चाहिए। बिना खिले हुए फूल (कली) और कीड़ों द्वारा खाए गए फूल वर्जित हैं। केवल बेलपत्र और तुलसी को धोकर दोबारा चढ़ाया जा सकता है।

पुष्प अर्पण शंका समाधान (FAQs)

पौराणिक कथा के अनुसार, तुलसी जी ने भगवान गणेश जी को विवाह का प्रस्ताव दिया था, जिसे गणेश जी ने ब्रह्मचर्य का पालन करने के कारण ठुकरा दिया। इस पर क्रोधित होकर तुलसी जी ने उन्हें दो विवाह होने का शाप दिया, और गणेश जी ने तुलसी जी को एक असुर से विवाह होने का शाप दिया। इसी कारण गणेश पूजा में तुलसी दल वर्जित माना जाता है (केवल गणेश चतुर्थी के दिन को छोड़कर)।

हाँ, आगम शास्त्रों के अनुसार बेलपत्र, तुलसी दल और शमी पत्र कभी बासी नहीं माने जाते। यदि ताजे पत्ते उपलब्ध न हों, तो अर्पित किए गए पत्तों को उठाकर गंगाजल से धोकर दोबारा भगवान पर श्रद्धापूर्वक चढ़ाया जा सकता है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

आगम संहिता व इतिहास संपादन

भक्तिलोक पुष्प विज्ञान पीठ (Bhaktilok Pushpa Research Wing)

शिव पुराण, विष्णु पुराण और देवी भागवत के पुष्पार्पण अध्यायों के श्लोकों का संकलन करने वाली विंग।

शास्त्र व अनुष्ठान समीक्षा

पं. रुद्रदत्त शास्त्री (Pt. Rudradatta Shastri)

वरिष्ठ अर्चक व शास्त्र व्याख्याता, वाराणसी मदन मोहन मन्दिर। ३२+ वर्षों का पूजा विधान संपादन व पुष्प महत्व व्याख्या अनुभव।

पुष्प नियम सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें