आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
विष्णु व्रत

एकादशी व्रत कैलेंडर २०२६

पद्म पुराण के अनुसार, एकादशी व्रत समस्त व्रतों में सर्वोत्तम है। यह मन और शरीर की शुद्धि तथा प्रभु भक्ति प्राप्त करने का सरलतम साधन है। वर्ष २०२६ की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की सभी २४ एकादशियों के पावन व्रत दिन, पारण मुहूर्त समय और फलाहार नियमों की प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करें।

तिथियां: वर्ष २०२६ सम्पूर्ण सूची प्रामाणिकता: हरिभक्तिविलास ग्रंथ

एकादशी व्रत तालिका २०२६

नीचे वर्ष २०२६ की सभी आगामी एकादशी तिथियां व उनके महत्व की विस्तृत सूची दी गई है। पारण मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें:

व्रत तिथि 25-08-2026

श्रावण पुत्रदा एकादशी

पुत्रदा एकादशी व्रत का अत्यंत धार्मिक महत्व है।

पारण मुहूर्त: प्रातः ०६:१५ - ०८:४५

एकादशी व्रत के ७ अनिवार्य शास्त्रोक्त नियम

व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए दशमी, एकादशी और द्वादशी के नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए:

अन्न व चावल का सर्वथा निषेध

एकादशी के दिन चावल, गेहूं, दालें और अन्य अनाज खाना पूरी तरह से वर्जित है। माना जाता है कि इस दिन अन्न में पाप पुरुषों का वास होता है। फलाहार में कुट्टू का आटा, साबूदाना या फल लिए जा सकते हैं।

पारण मुहूर्त का महत्व (Parana Rules)

द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने पर ही पारण (व्रत खोलना) किया जाना चाहिए। पारण समय पर तुलसी दल व जल लेकर श्री हरि विष्णु का स्मरण कर व्रत पूर्ण करें।

एकादशी व्रत शंका समाधान (FAQs)

नहीं, शास्त्रों में शारीरिक असमर्थता की स्थिति में नियमों में छूट दी गई है। बीमार, वृद्ध, गर्भवती महिलाएं अथवा बच्चे फलाहार (दूध, फल, पानी) के साथ व्रत रख सकते हैं। ईश्वर भाव के भूखे हैं, हठ के नहीं।

धार्मिक कथा के अनुसार, महर्षि मेधा के शरीर के अंश धरती में समा गए और उनसे जौ तथा चावल उत्पन्न हुए। इसलिए माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस के समान है। वैज्ञानिक दृष्टि से, चावल में पानी सोखने की क्षमता अधिक होती है जिससे एकादशी के दिन इसके सेवन से शरीर का जल स्तर बढ़ता है और ध्यान व उपवास में बाधा उत्पन्न होती है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

तिथि गणना व संपादन

भक्तिलोक पंचांग परिषद (Bhaktilok Panchang Wing)

शुद्ध वैदिक गणित और सूर्य सिद्धांत के आधार पर पारण समय और तिथियों का मिलान करने वाली परिषद।

धर्मशास्त्र समीक्षा व सत्यापन

पं. मदन मोहन शास्त्री (Pt. Madan Mohan Shastri)

वैदिक कर्मकांड विभागाध्यक्ष, संस्कृत विद्यापीठ प्रयागराज। ३२+ वर्षों का हरिभक्ति विलास ग्रंथ अध्यापन व व्रत पंचांग समीक्षा अनुभव।

पंचांग तिथियां सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें