उपयुक्त दान व पुण्य फल नियोजक
अनुशंसित दान विवरण
| १. अनुशंसित दान सामग्री: | 0 |
| २. दान का सर्वश्रेष्ठ समय (Kaal): | 0 |
| ३. आध्यात्मिक व ज्योतिषीय लाभ: | 0 |
| गीता अनुसार सत्पात्र को दिया दान सात्विक होता है। | |
दान के तीन भेद – श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय १७, श्लोक २०-२२)
भगवान कृष्ण ने गीता में दान की मानसिकता के आधार पर इसे तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है:
कर्तव्य समझकर, बिना किसी फल की आशा के, सही समय (Kaal) और सही स्थान (Desh) पर योग्य सत्पात्र (Patra) को दिया जाने वाला दान सात्विक है।
जो दान प्रत्युपकार की भावना (बदले में कुछ पाने की आशा) या लोक-दिखावे (नाम कमाने) के लिए भारी मन से किया जाता है, वह राजसिक कहलाता है।
अनादर पूर्वक, अयोग्य स्थान पर, कुपात्र (नशेड़ी/अपराधी) को बिना आदर-सत्कार के दिया जाने वाला दान तामसिक माना गया है।
दान धर्म शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
दान संहिता व तिथि मिलान
भक्तिलोक धर्मशास्त्र समीक्षा परिषद (Bhaktilok Dharmashastra Council)
विभिन्न स्मृति ग्रंथों और पुराणों के दान-महात्म्य अध्यायों के आधार पर दान सुझाव तैयार करने वाली समिति।
कर्मकांड व शास्त्र समीक्षा
पं. भालचंद्र शास्त्री (Pt. Bhalchandra Shastri)
वरिष्ठ ज्योतिषी व कर्मकांड विशेषज्ञ, काशी विश्वनाथ संस्कृत विद्यापीठ। ३०+ वर्षों का यज्ञ व दान अनुष्ठान मार्गदर्शन अनुभव।
दान विभाजन सत्यापित