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दीपोत्सव

दीया आवश्यकता कैलकुलेटर

सनातन परम्परा में अग्नि प्रकाश को साक्षात तेजस्वरूप परमात्मा माना गया है। कार्तिक मास दीपदान, दीपावली अथवा गृह प्रवेश के शुभ अवसर पर घर के द्वारों, झरोखों और पूजा स्थान के अनुसार शुभ संख्या में दीये जलाए जाते हैं। मिट्टी के दीयों की संख्या, तेल/घी की मात्रा और रूई बत्ती का सही वित्तीय व मात्रात्मक आकलन करें।

उद्देश्य: दीप प्रज्ज्वलन गणना नियम: दिशा-दशमलव शुद्धता

दीया व ईंधन (गैस/तेल) आवश्यकता आकलन

दीप सामग्री आकलन

१. आवश्यक मिट्टी के दीये (Diyas):0 पीस
२. अनुमानित घी/तेल (Fuel Quantity):0 मिलीलीटर (ml)
३. आवश्यक रूई बत्ती (Cotton Wicks):0 नग
सुझाव: तुलसी जी के समीप शुद्ध घी का दीया जलाएं।

दीपक प्रज्ज्वलन व दिशा के महत्वपूर्ण नियम

शास्त्रों के अनुसार, जलते हुए दीपक की बत्ती (Wick) की दिशा का साधक के स्वास्थ्य, धन और भाग्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है:

पूर्व व उत्तर दिशा (East & North)

पूर्व दिशा: आयु और आरोग्य में वृद्धि होती है।
उत्तर दिशा: धन, समृद्धि और व्यापार में सफलता मिलती है।

दक्षिण व पश्चिम दिशा (South & West)

पश्चिम दिशा: उदासीन फल देती है।
दक्षिण दिशा: केवल पितरों के निमित्त, यम दीपदान या यमराज की पूजा के समय ही बत्ती का मुख दक्षिण की ओर किया जाता है। सामान्य पूजा में वर्जित है।

दीपोत्सव शंका समाधान (FAQs)

गाय के घी का दीपक देव कृपा और सात्विक ऊर्जा उत्पन्न करता है, यह सर्वोत्तम माना जाता है। तेल का दीपक (सरसों या तिल का तेल) शनि पीड़ा निवारण, बाधाओं को दूर करने और शत्रु शांति के लिए जलाया जाता है। पूजा में हमेशा घी का दीया अपनी बाईं ओर और तेल का दीया दाईं ओर रखना चाहिए।

नहीं, मिट्टी के दीये एक बार जलने के बाद अपवित्र (उच्छिष्ट) हो जाते हैं क्योंकि मिट्टी तेल/घी को सोख लेती है। इसलिए शास्त्रों के अनुसार हर बार नए मिट्टी के दीयों का प्रयोग करना चाहिए। केवल पीतल या तांबे के दीयों को धोकर बार-बार जलाया जा सकता है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

दीप गणना व संपादन

भक्तिलोक दीपोत्सव परिषद (Bhaktilok Deepa Desk)

त्यौहार परंपराओं और तेल उपभोग मात्रा समीकरणों के आधार पर सटीक गणना करने वाली विंग।

कर्मकांड व वास्तु शास्त्र समीक्षा

वास्तुविद आचार्य विनय कुमार शुक्ल (Vinay Kumar Shukla)

वास्तु और वैदिक पूजा पद्धतियों के विशेषज्ञ। २८+ वर्षों का गृह प्रवेश व देव दीपावली अनुष्ठान संचालन अनुभव।

दीप गणना सूत्र सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें