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काल चक्र

हिन्दू पंचांग कैलेंडर

हिन्दू कैलेंडर केवल दिनों की गिनती नहीं है, यह चन्द्रमा की गतियों (Lunar Phases) और ब्रह्मांडीय ऊर्जा संधियों का खगोलीय विवरण है। आने वाले प्रमुख पर्वों, पवित्र एकादशी तिथियों, पूर्णिमा और अमावस्या व्रतों की समय सारणी को विस्तार से जानें।

काल गणना: वैदिक ज्योतिष पंचांग अंग: ५ मुख्य अंग
15 Aug 2026 उत्सव (Festival)

स्वतंत्रता दिवस उत्सव

राष्ट्रीय पर्व के साथ आध्यात्मिक प्रार्थनाएँ।

फलाहार नियम: सात्विक भोजन ग्रहण करें।
25 Aug 2026 एकादशी (Ekadashi)

श्रावण पुत्रदा एकादशी

पुत्रदा एकादशी व्रत का अत्यंत धार्मिक महत्व है।

फलाहार नियम: मर्यादित फलाहार (बिना अन्न)।
28 Aug 2026 पूर्णिमा (Purnima)

श्रावण पूर्णिमा / रक्षाबंधन

भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा।

फलाहार नियम: खीर, पूड़ी एवं मिष्ठान का सात्विक भोग।
10 Sep 2026 अमावस्या (Amavasya)

भाद्रपद अमावस्या

पितृ तर्पण एवं दान-पुण्य के लिए अमावस्या तिथि।

फलाहार नियम: तर्पण के पश्चात ब्राह्मण भोजन कराएं।

हिन्दू पंचांग का वैज्ञानिक आधार (५ मुख्य अंग)

हिन्दू कैलेंडर सौर और चन्द्र दोनों गणनाओं का मिश्रण है (Lunisolar Calendar)। इसके पांच मुख्य अंग होते हैं, जिन्हें मिलाकर **पंचांग** कहा जाता है:

१. तिथि (Tithi)

चन्द्रमा और सूर्य के बीच के अंतर को १२ अंशों के भागों में बांटने से तिथि बनती है। कुल ३० तिथियां होती हैं (१५ शुक्ल पक्ष, १५ कृष्ण पक्ष)।

२. वार (Var)

सप्ताह के ७ दिन जो ७ सौर मंडल ग्रहों के नाम पर आधारित हैं (सोम, मंगल, बुध आदि)।

३. नक्षत्र (Nakshatra)

आकाश मंडल के २७ भागों में से चन्द्रमा आज जिस भाग में गोचर कर रहा है, वह नक्षत्र कहलाता है।

४. योग व ५. करण (Yoga & Karana)

सूर्य और चन्द्रमा के स्थान योग से कुल २७ योग बनते हैं, और तिथि के आधे भाग को 'करण' कहा जाता है (कुल ११ करण होते हैं)।

हिन्दू कैलेंडर शंका समाधान (FAQs)

विक्रम संवत महाराज विक्रमादित्य द्वारा शुरू किया गया था और यह ईसवी सन (Gregorian Calendar) से ५७ वर्ष आगे चलता है। उदाहरण के लिए, यदि वर्तमान में ईसवी सन २०२६ है, तो विक्रम संवत २०८३ होगा।

चन्द्र वर्ष ३५४ दिनों का होता है और सौर वर्ष ३६५ दिनों का। दोनों के बीच ११ दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर ३२ महीने (लगभग ३ साल) में चन्द्र पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहते हैं।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

कैलेंडर तिथि संपादन

भक्तिलोक पंचांग परिषद (Bhaktilok Panchang Council)

वैदिक गणित गणनाओं और स्थानिक गृह गोचर स्थितियों के आधार पर उत्सव और व्रत सूचियां सत्यापित करने वाली विंग।

ज्योतिषीय समीक्षा व सत्यापन

पं. देवदत्त शास्त्री (Pt. Devdutt Shastri)

वाराणसी पंचांग शोध केंद्र के अध्यक्ष। ३५+ वर्षों का वैदिक पंचांग लेखन व संपादन अनुभव।

कैलेंडर तिथियां सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें