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वैदिक ज्योतिष विद्या

शुभ कार्य दिवस खोजक

सनातन पंचांग पद्धति के अनुसार समय चक्र के पांच प्रमुख अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण) मिलकर किसी समय की शुभता तय करते हैं। नए गृह प्रवेश, वाहन क्रय, भूमि निवेश या स्वर्ण खरीदारी जैसे महत्वपूर्ण जीवन कर्मों को अनुकूल ब्रह्मांडीय स्पंदनों (Cosmic Vibrations) के साथ संरेखित करने के लिए नीचे अपना कार्य चुनें।

विधा: मुहूर्त शास्त्र सिद्धांत प्रभाव: विघ्न नाश व समृद्धि

शुभ कार्य व नक्षत्र संरेखक

भूमि / गृह प्रवेश मुहूर्त

बृहस्पतिवार, शुक्रवार अनुकूल
श्रेष्ठ नक्षत्र (Best Stars):

रोहिणी, उत्तराभाद्रपद, अनुराधा, मृगशिरा

वैदिक ज्योतिषीय सलाह (Vedic Advice):

विशाखा या अनुराधा नक्षत्र का होना गृह प्रवेश को दीर्घायु समृद्धि देता है। शनिवार व मंगलवार को सामान्यतः गृहप्रवेश टालना चाहिए।

मुहूर्त शास्त्र के पांच मुख्य अंग

वैदिक मुहूर्त केवल तिथि पर निर्भर नहीं करता। इसमें पांच कारकों का सूक्ष्म संयोजन देखा जाता है:

१. तिथि (Tithi) व वार (Day)

रिक्ता तिथियों (४, ९, १४) को नया कार्य वर्जित है। पूर्ण तिथियां (पूर्णिमा, ५, १०, १५) श्रेष्ठ होती हैं। बृहस्पतिवार व शुक्रवार मांगलिक कार्यों के लिए अति शुभ हैं।

२. नक्षत्र (Nakshatra) व योग (Yoga)

नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति को दर्शाते हैं। पुष्य, रोहिणी व मृगशिरा जैसे ध्रुव व कल्याणकारी नक्षत्र कार्यों की सिद्धि में स्थायी परिणाम प्रदान करते हैं।

विभिन्न कार्यों के लिए दिशा व नक्षत्र नियम

वाहन खरीद नियम: वाहन क्रय करते समय राहुकाल की अवधि का त्याग करना आवश्यक है। शनिवार को लोहे या वाहन की खरीद ज्योतिषीय दृष्टि से अनुकूल नहीं मानी जाती क्योंकि शनिवार शनिदेव (लोहे के अधिपति) का वार है।

स्वर्ण व निवेश नियम: गुरु-पुष्य योग (बृहस्पतिवार को पुष्य नक्षत्र) में सोना खरीदना समृद्धि का कारक है। इस योग में खरीदा गया सोना अक्षय फल देता है।

मुहूर्त निर्धारण संबंधी जिज्ञासाएं (FAQs)

नहीं, पुष्य नक्षत्र को सभी प्रकार के भौतिक व व्यावसायिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है, परंतु शास्त्रों के अनुसार 'विवाह संस्कार' के लिए पुष्य नक्षत्र वर्जित है। विवाह के लिए रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी तथा मूल नक्षत्रों को श्रेष्ठ माना गया है।

राहुकाल प्रतिदिन लगभग डेढ़ घंटे की अवधि का वह समय है जिसका अधिपति राहु ग्रह होता है। इस काल में किया गया कोई भी शुभ या नया कार्य विघ्न-बाधाओं से घिर जाता है और उसमें असफलता की संभावना बढ़ जाती है। अतः राहुकाल टालना अनिवार्य है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

मुहूर्त शास्त्र व नक्षत्र मिलान संकलन

भक्तिलोक पंचांग परिषद (Bhaktilok Panchang Council)

नारद संहिता तथा मुहूर्त चिंतामणि के सिद्धांतों के आधार पर दैनिक कार्यों के लिए अनुकूल मुहूर्त गणना संकलित करने वाली परिषद।

ज्योतिषीय समीक्षा व प्रामाणिकता

पं. मदन मोहन शास्त्री (Pt. Madan Mohan Shastri)

प्रसिद्ध मुहूर्त विज्ञानी व संस्कृत ग्रंथाचार्य। ३०+ वर्षों का पंचांग व ज्योतिष समीक्षा अनुभव।

मुहूर्त गणना परीक्षित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें