आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
काल गणना

आज का पंचांग

सनातन हिंदू काल गणना पद्धति पर आधारित पंचांग पाँच अंगों से मिलकर बनता है—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। यह दैनिक पंचांग आपको शुभ कार्यों के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त, अमृत काल और त्याज्य समय राहुकाल की अत्यंत सटीक गणना प्रदान करता है।

दिनांक: 09 August 2026 संवत: विक्रम संवत २०८३ चन्द्रायन: Waxing Gibbous

virtual शंखनाद व घंटा ध्वनि (Vedic Bell Sound)

पंचांग को देखने और दैनिक संकल्प करने से पूर्व शंख ध्वनि या घंटी नाद बजाएं।

दैनिक काल विवरण

  • तिथिएकादशी (Ekadashi)
  • नक्षत्ररोहिणी (Rohini)
  • योगहर्षण (Harshana)
  • करणबव (Bava)

नक्षत्र व राशि योग

  • नक्षत्र देवताप्रजापति (Prajapati)
  • नक्षत्र प्रतीकरथ (Chariot)
  • नक्षत्र चरण1
  • चंद्र राशिवृषभ (Taurus)

सूर्य संचरण

  • सूर्योदय05:42 AM
  • सूर्यास्त06:55 PM
  • दिन का मान (Day Length)13 hours 13 minutes

चंद्र संचरण

  • चंद्रोदय07:30 PM
  • चंद्रास्त06:15 AM
  • चंद्र पक्षWaxing Gibbous

ब्रह्म मुहूर्त

समय: 04:12 AM - 05:02 AM

अमृत सिद्धि (Amrit Siddhi)

अभिजित मुहूर्त

समय: 11:45 AM - 12:35 PM

अति शुभ (Very Auspicious)

अमृत काल

समय: 02:15 PM - 03:05 PM

अमृत सिद्धि (Amrit Siddhi)

राहुकाल

समय: 03:30 PM - 05:05 PM

इस समय अवधि में नया व्यवसाय, गृह प्रवेश या कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।

यमगंड काल

समय: 07:18 AM - 08:53 AM

यह समय भी अशुभ माना गया है, विशेष रूप से यात्रा आरंभ करने और महत्वपूर्ण सौदों के लिए वर्जित है।

गुलिक काल

समय: 12:20 PM - 01:55 PM

इस काल में किया गया कार्य देरी से सिद्ध होता है, अतः सामान्यतः इसे टाला जाता है।

आज का दैनिक संकल्प मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

भावार्थ: मैं भगवान वासुदेव को नमन करता हूँ।

आज के प्रमुख व्रत व त्यौहार

पुत्रदा एकादशी व्रत, स्वतंत्रता दिवस पर्व

विशेष ज्योतिषीय गोचर

अति विशेष आध्यात्मिक योग

सनातन काल गणना: पंचांग के ५ प्रमुख अंग

वैदिक ज्योतिष में पंचांग का अर्थ है **"पाँच अंग" (Five Limbs)**। इन अंगों का अपना विशिष्ट गणितीय और आध्यात्मिक महत्व है:

  • १. तिथि (Tithi): सूर्य और चंद्रमा के मध्य के कोणीय अंतर (12 डिग्री प्रति तिथि) के आधार पर तिथि का निर्धारण होता है। तिथि चंद्रमा की कलाओं को दर्शाती है।
  • २. वार (Vara): सूर्योदय से अगले सूर्योदय के मध्य का चक्र एक वार कहलाता है। प्रत्येक दिन का स्वामी एक विशेष ग्रह होता है।
  • ३. नक्षत्र (Nakshatra): चंद्रमा राशि चक्र के जिस 13 डिग्री 20 मिनट के नक्षत्र क्षेत्र से गुजरता है, उसे दैनिक नक्षत्र कहते हैं। कुल 27 नक्षत्र माने गए हैं।
  • ४. योग (Yoga): सूर्य और चंद्रमा के देशांतर योग के आधार पर 27 योगों की गणना होती है।
  • ५. करण (Karana): आधा तिथि के मान को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं, जिनमें 4 स्थिर और 7 चर करण होते हैं।

शुभ मुहूर्त और अशुभ चौघड़िया का महत्व

ब्रह्मांड निरंतर गतिशील है और प्रत्येक क्षण की ऊर्जा भिन्न होती है। पंचांग का मुख्य उद्देश्य जातक को उस समय की जानकारी देना है जब सौर और चंद्र किरणें पृथ्वी पर सर्वाधिक अनुकूल प्रभाव डाल रही हों:

ब्रह्म मुहूर्त साधना: सूर्योदय से लगभग १ घंटा ३६ मिनट पूर्व का समय ब्रह्मा मुहूर्त कहलाता है। इस समय वायुमंडल में सत्व गुण की प्रधानता होती है, जिससे ध्यान और स्वाध्याय सर्वोत्तम फल देते हैं।
अभिजित मुहूर्त का बल: दिन के मध्य (जब सूर्य आकाश में सबसे ऊँचा हो) के लगभग २४ मिनट पूर्व और २४ मिनट पश्चात का समय अभिजित मुहूर्त माना जाता है। इस मुहूर्त में भगवान विष्णु का आशीर्वाद रहता है।
राहुकाल परिहार: सप्ताह के प्रत्येक दिन का एक विशिष्ट भाग (लगभग ९० मिनट) राहु ग्रह के प्रभाव में रहता है, जिसे राहुकाल कहा जाता है। इस अवधि में नए अनुबंध या यात्रा आरंभ करना वर्जित है।

पंचांग सम्बन्धी आम प्रश्न (FAQs)

भक्तिलोक पर दिए गए पंचांग की दैनिक गणना मुख्य रूप से भारतीय मानक समय (IST) और मध्य भारत के अक्षांश/रेखांश (उज्जैन/वाराणसी) की काल गणना पद्धति पर आधारित होती है।

हाँ, राहुकाल के दौरान दैनिक नित्य कर्म, नियमित भगवान की पूजा, आरती, हनुमान चालीसा का पाठ अथवा ध्यान करने में कोई मनाही नहीं है। केवल नया शुभ कार्य, विवाह, अथवा गृह प्रवेश आरंभ करना वर्जित है।

विक्रम संवत ईस्वी सन से लगभग ५७ वर्ष आगे चलता है। उदाहरण के लिए, ईस्वी सन २०२६ में विक्रम संवत २०८३ चल रहा होता है। यह चंद्रमा और सूर्य दोनों गतियों पर आधारित चंद्र-सौर कैलेंडर है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

ज्योतिषीय गणना एवं संकलन

भक्तिलोक पंचांग शोध परिषद् (Bhaktilok Panchang Council)

वैदिक गणितीय गणना एवं पंचांग सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम से प्रमाणित दैनिक डेटा प्रदाता संस्था।

तथ्य-जांच व शास्त्र समीक्षा

डॉ. विकास शास्त्री (Dr. Vikas Shastri)

वैदिक संस्कृति व ज्योतिष शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान। पीएचडी (वैदिक ज्योतिष अध्ययन)।

प्रामाणिकता सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ अध्ययन काल: ५ मिनट पढ़ें

एआई आध्यात्मिक मार्गदर्शक (AI Guru)

वत्स! मैं भक्तिलोक का डिजिटल आध्यात्मिक सहायक हूँ। सनातन धर्म, ध्यान साधना, या प्रमुख मंदिर यात्राओं के संबंध में कोई भी जिज्ञासा व्यक्त करें। अभी
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