आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
नक्षत्र ज्योतिष

आज का नक्षत्र

चन्द्रमा २७.३ दिनों में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूर्ण करता है। इस पथ को ऋषियों ने २७ समान भागों में विभाजित किया है, जिन्हें **नक्षत्र (Lunar Mansions)** कहा जाता है। प्रत्येक नक्षत्र का अपना विशिष्ट स्वामी देवता और तत्व होता है, जो आज के दिन की मानसिक ऊर्जा को नियंत्रित करता है।

काल चक्र: पंचांग नक्षत्र गणना: वैदिक गणित
10 Aug 2026 | दैनिक नक्षत्र फल

मृगशिरा (Mrigashira)

मृगशिरा नक्षत्र के जातक जिज्ञासु, खोजी प्रवृत्ति के और यात्रा प्रिय होते हैं। यह ज्ञान संचय और मित्रता के लिए शुभ है।

  • स्वामी देवता (Deity):चन्द्र देव (Soma)
  • प्रतीक चिह्न (Symbol):हिरण का सिर
  • स्वामी ग्रह (Ruling Planet):मंगल
  • नक्षत्र प्रकृति (Nature):मृदु व खोजी

नक्षत्र शास्त्र का वैदिक महत्व

पंचांग के पांच अंगों (तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण) में **नक्षत्र** को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है। यह सीधे तौर पर जातक के मन (Moon) को प्रभावित करता है।

जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, वही जातक का **जन्म नक्षत्र** कहलाता है। जन्म नक्षत्र से ही व्यक्ति के स्वभाव, रुचि और जीवन की दशा चक्र का निर्धारण होता है। नित्य नक्षत्र की अनुकूलता जानकर कार्य करने से कार्यों में सफलता की संभावना अधिक होती है।

२७ नक्षत्रों के नाम व उनके स्वामी देव

क्रम नक्षत्र का नाम स्वामी देवता (Deity) स्वामी ग्रह (Ruling Planet)
अश्विनी (Ashwini)अश्विनी कुमारकेतु
भरणी (Bharani)यमराजशुक्र
कृत्तिका (Krittika)अग्नि देवसूर्य
रोहिणी (Rohini)ब्रह्मा जीचन्द्रमा
मृगशिरा (Mrigashira)चन्द्र देवमंगल
आर्द्रा (Ardra)रुद्र (शिव)राहु
पुनर्वसु (Punarvasu)अदितिबृहस्पति

नक्षत्र सम्बन्धी शंका समाधान (FAQs)

२७ नक्षत्रों में ६ नक्षत्रों (अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती) को गंडमूल नक्षत्र माना जाता है। ये नक्षत्र संधि काल में आते हैं। इनमें जन्म लेने वाले जातकों के लिए २७वें दिन शांति पूजा कराने का विधान शास्त्रों में वर्णित है।

हाँ, बिल्कुल। अपने जन्म नक्षत्र के स्वामी देवता की नियमित उपासना करने से कुंडली के अशुभ ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा व शांति की प्राप्ति होती है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

नक्षत्र गणना व संपादन

भक्तिलोक पंचांग परिषद (Bhaktilok Panchang Council)

वैदिक खगोल शास्त्र और स्थानीय चंद्र गोचर के आधार पर नक्षत्रों के स्वामी और प्रभावों की सटीक गणना करने वाली विंग।

ज्योतिषीय समीक्षा व सत्यापन

आचार्य देवव्रत शुक्ल (Acharya Devvrat Shukla)

ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक व सिद्ध हस्त नक्षत्र शास्त्री। ३०+ वर्षों का फलित ज्योतिष अनुभव।

नक्षत्र गणना सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें