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७ चौघड़िया मुहूर्त एवं उनके फल
चौघड़िया मुख्यतः ग्रहों के अधिपति नक्षत्रों पर आधारित होते हैं। प्रत्येक चौघड़िया का नाम उसके विशिष्ट फल और कंपन (Vibrational Energy) को दर्शाता है:
इसे अमृत के समान कल्याणकारी माना जाता है। सभी प्रकार के शुभ एवं मांगलिक कार्यों को प्रारंभ करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ काल है।
बृहस्पति (गुरु) के प्रभाव में होने से शिक्षा, विवाह, उपनयन संस्कार तथा धार्मिक अनुष्ठानों के लिए यह मुहूर्त सर्वोत्तम होता है।
व्यापार, नए सौदे, खाता बही आरंभ करने व शिक्षा क्षेत्र में नए प्रयोगों हेतु अत्यंत शुभदायक काल माना जाता है।
चर का अर्थ है चलायमान। अतः यात्रा शुरू करने, वाहन खरीदने तथा गतिज मशीनरी कार्यों के लिए यह उपयुक्त समय है।
चौघड़िया की गणितीय गणना पद्धति
चौघड़िया की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करती है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय (दिनमान) को **८ बराबर भागों** में बांटा जाता है, जिसे **'दिन का चौघड़िया'** कहते हैं। इसी प्रकार सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय (रात्रिमान) को **८ बराबर भागों** में बांटा जाता है, जिसे **'रात्रि का चौघड़िया'** कहा जाता है।
दिन के ८ भागों में से प्रत्येक भाग की अवधि लगभग **१ घंटा ३० मिनट (डेढ़ घंटा)** होती है। इस समय को संस्कृत में 'याम' या 'प्रहर' का आधा भाग भी कहा जाता है, जिसके कारण इसे 'चौघड़िया' नाम मिला है (१ घड़िया = २४ मिनट, ४ घड़िया = ९६ मिनट यानी १ घंटा ३६ मिनट)।
चौघड़िया मुहूर्त संबंधी शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
ज्योतिषीय गणना व गणितीय संकलन
भक्तिलोक पंचांग परिषद (Bhaktilok Panchang Council)
स्थानीय अक्षांश-रेखांश के अनुसार सूर्योदय व सूर्यास्त की सटीक गणना कर दैनिक चौघड़िया सारणी तैयार करने वाली विशेषज्ञ मंडली।
धार्मिक तथ्य-सत्यापन एवं समीक्षा
पं. मदन मोहन शास्त्री (Pt. Madan Mohan Shastri)
प्रसिद्ध पंचांगीय गणितज्ञ व ज्योतिषाचार्य। ३०+ वर्षों का मुहूर्त शास्त्र का अनुभव।
मुहूर्त गणना परीक्षित