कवच स्तोत्र

आज की चालीसा

चालीसा (४० चौपाइयों का स्तोत्र) एक शक्तिशाली आध्यात्मिक कवच है। नित्य नियम से चालीसा का पाठ करने से हमारे मन के भीतर का भय और असुरक्षा की भावना समाप्त होती है और इच्छाशक्ति सुदृढ़ होती है। आज की अनुशंसित चालीसा, भावार्थ और पाठ विधि को जानें।

प्रभाव: आत्मविश्वास व संकट हरण आवृत्ति: नित्य स्तुति
26 Sep 2026 | दैनिक अनुशंसित स्तोत्र

हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa in hindi

<div> <div> <h2>मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन</h2> <p>शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें</p> </div> <div> <div> <p>वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु <a href="https://bhaktilok.in/hanuman-chalisa-in-hindi">हनुमान चालीसा संग्रह</a> को नियमित रूप से पढ़ें।</p>
<h3 >&nbsp;हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa</h3><p ><b>॥ श्री हनुमान चालीसा ॥</b></p><p ><b>॥ दोहा॥</b></p><p ><b>श्रीगुरु चरन सरोज रज</b></p><p ><b>निज मनु मुकुरु सुधारि ।</b></p><p ><b>बरनउँ रघुबर बिमल जसु</b></p><p ><b>जो दायकु फल चारि ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>बुद्धिहीन तनु जानिके</b></p><p ><b>सुमिरौं पवन-कुमार ।</b></p><p ><b>बल बुधि बिद्या देहु मोहिं</b></p><p ><b>हरहु कलेस बिकार ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>॥ चौपाई ॥</b></p><p ><b>जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।</b></p><p ><b>जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>राम दूत अतुलित बल धामा ।</b></p><p ><b>अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>महाबीर बिक्रम बजरंगी ।</b></p><p ><b>कुमति निवार सुमति के संगी ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>कंचन बरन बिराज सुबेसा ।</b></p><p ><b>कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥४</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै ।</b></p><p ><b>काँधे मूँज जनेउ साजै ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>शंकर सुवन केसरी नंदन ।</b></p><p ><b>तेज प्रताप महा जगवंदन ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>बिद्यावान गुनी अति चातुर ।</b></p><p ><b>राम काज करिबे को आतुर ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।</b></p><p ><b>राम लखन सीता मन बसिया ॥८</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।</b></p><p ><b>बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>भीम रूप धरि असुर सँहारे ।</b></p><p ><b>रामचन्द्र के काज सँवारे ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>लाय सजीवन लखन जियाए ।</b></p><p ><b>श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।</b></p><p ><b>तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।</b></p><p ><b>अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।</b></p><p ><b>नारद सारद सहित अहीसा ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।</b></p><p ><b>कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।</b></p><p ><b>राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना ।</b></p><p ><b>लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>जुग सहस्त्र जोजन पर भानु ।</b></p><p ><b>लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।</b></p><p ><b>जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>दुर्गम काज जगत के जेते ।</b></p><p ><b>सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥२०</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>राम दुआरे तुम रखवारे ।</b></p><p ><b>होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।</b></p><p ><b>तुम रक्षक काहू को डरना ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>आपन तेज सम्हारो आपै ।</b></p><p ><b>तीनों लोक हाँक तै काँपै ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।</b></p><p ><b>महावीर जब नाम सुनावै ॥२४</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>नासै रोग हरै सब पीरा ।</b></p><p ><b>जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>संकट तै हनुमान छुडावै ।</b></p><p ><b>मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>सब पर राम तपस्वी राजा ।</b></p><p ><b>तिनके काज सकल तुम साजा ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>और मनोरथ जो कोई लावै ।</b></p><p ><b>सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>चारों जुग परताप तुम्हारा ।</b></p><p ><b>है परसिद्ध जगत उजियारा ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>साधु सन्त के तुम रखवारे ।</b></p><p ><b>असुर निकंदन राम दुलारे ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।</b></p><p ><b>अस बर दीन जानकी माता ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>राम रसायन तुम्हरे पासा ।</b></p><p ><b>सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>तुम्हरे भजन राम को पावै ।</b></p><p ><b>जनम जनम के दुख बिसरावै ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>अंतकाल रघुवरपुर जाई ।</b></p><p ><b>जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>और देवता चित्त ना धरई ।</b></p><p ><b>हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>संकट कटै मिटै सब पीरा ।</b></p><p ><b>जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>जै जै जै हनुमान गोसाईं ।</b></p><p ><b>कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>जो सत बार पाठ कर कोई ।</b></p><p ><b>छूटहि बंदि महा सुख होई ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।</b></p><p ><b>होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>तुलसीदास सदा हरि चेरा ।</b></p><p ><b>कीजै नाथ हृदय मह डेरा ॥४०</b></p><p ><b><br /></b></p><p ><b>॥ दोहा ॥</b></p><p ><b>पवन तनय संकट हरन,</b></p><p ><b>मंगल मूरति रूप ।</b></p><p ><b>राम लखन सीता सहित,</b></p><p ><b>हृदय बसहु सुर भूप ॥</b></p>
<script type="application/ld+json">{"@context":"https:\/\/schema.org","@type":"FAQPage","mainEntity":[{"@type":"Question","name":"हनुमान जी के भजनों से क्या लाभ मिलता है?","acceptedAnswer":{"@type":"Answer","text":"हनुमान जी के भजन से आत्मविश्वास बढ़ता है, सभी प्रकार का भय दूर होता है और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।"}},{"@type":"Question","name":"हनुमान पूजा के लिए कौन से दिन श्रेष्ठ हैं?","acceptedAnswer":{"@type":"Answer","text":"हनुमान जी की साधना के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सर्वश्रेष्ठ और संकट निवारक माना गया है।"}},{"@type":"Question","name":"शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है?","acceptedAnswer":{"@type":"Answer","text":"शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि जो भी बजरंगबली की आराधना करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा का सामना नहीं करना पड़ेगा।"}}]}</script> </div> </div> <div> <i></i> साझा करें: <a href="https://api.whatsapp.com/send?text=%E0%A4%B9%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8+%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%BE+%7C+Hanuman+Chalisa+in+hindi%20http%3A%2F%2F127.0.0.1%2Fbhaktilok%2F2022%2F05%2Fhanuman-chalisa.html" target="_blank" title="WhatsApp पर साझा करें"><i></i></a> <a href="https://www.facebook.com/sharer/sharer.php?u=http%3A%2F%2F127.0.0.1%2Fbhaktilok%2F2022%2F05%2Fhanuman-chalisa.html" target="_blank" title="Facebook पर साझा करें"><i></i></a> <a href="https://t.me/share/url?url=http%3A%2F%2F127.0.0.1%2Fbhaktilok%2F2022%2F05%2Fhanuman-chalisa.html&text=%E0%A4%B9%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8+%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%BE+%7C+Hanuman+Chalisa+in+hindi" target="_blank" title="Telegram पर साझा करें"><i></i></a> </div> <div> <div> <div> <h3><i></i> 🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ</h3> <p>संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन <strong>"हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa in hindi"</strong> बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।</p> <p>भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।</p> </div> </div> <div> <div> <h3><i></i> 🔍 विशेष महत्त्व और लाभ</h3> <p><strong>हनुमान चालीसा</strong> और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।</p> <p>वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु <a href="http://127.0.0.1/bhaktilok/hanuman-chalisa-in-hindi">हनुमान चालीसा संग्रह</a> को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।</p> </div> </div> </div> <div> <h3><i></i> 🕒 साधना एवं गायन विधि</h3> <p>हनुमान जी की पूजा के लिए <strong>मंगलवार</strong> और <strong>शनिवार</strong> का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।</p> </div> <div> <h3><i></i> ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)</h3> <div> <div><h5><i></i> हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?</h5><p>शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।</p></div><div><h5><i></i> क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?</h5><p>हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।</p></div><div><h5><i></i> शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?</h5><p>हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।</p></div> </div> </div> <script type="application/ld+json">{"@context":"https:\/\/schema.org","@type":"FAQPage","mainEntity":[{"@type":"Question","name":"हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?","acceptedAnswer":{"@type":"Answer","text":"शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।"}},{"@type":"Question","name":"क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?","acceptedAnswer":{"@type":"Answer","text":"हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।"}},{"@type":"Question","name":"शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?","acceptedAnswer":{"@type":"Answer","text":"हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।"}}]}</script></div>

४० छंदों (चालीसा) के पाठ का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

अध्ययनों के अनुसार, चालीस चौपाइयों या छंदों के निरंतर लयबद्ध उच्चारण से हमारे मस्तिष्क में स्थिर और गहरी अल्फा तरंगें (Alpha Waves) उत्सर्जित होती हैं।

यह हमारे अवचेतन मन की गहरी शुद्धि करता है, भय और चिंता को दूर करता है, और ध्यान की स्थिति में ले जाता है। विशेष रूप से हनुमान चालीसा में प्रयुक्त शब्द आत्मबल को जाग्रत करते हैं।

चालीसा पाठ के शास्त्रीय नियम व विधि

चालीसा पाठ का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए:

लाल या ऊनी आसन

हमेशा लाल रंग के या कुशा/ऊन के आसन पर बैठकर ही पाठ करें। जमीन पर बिना आसन के बैठकर पाठ करना वर्जित माना जाता है।

दीपक व जल पात्र

पाठ के दौरान सम्मुख गाय के घी या चमेली के तेल का दीपक जलाएं और तांबे के पात्र में जल भरकर रखें जिसे पाठ के बाद प्रसाद रूप में ग्रहण करें।

चालीसा पाठ शंका समाधान (FAQs)

हाँ, हनुमान चालीसा का पाठ रात में किया जा सकता है। विशेष रूप से यदि बुरे सपने आते हों या मन में भय व्याप्त हो, तो रात्रि में सोने से पहले पाठ करना अत्यंत फलदाई है।

नित्य १ या ३ बार पाठ करना शुभ है। विशेष संकट की घड़ी में या संकल्प सिद्धि के लिए ७, ११, या १०० बार पाठ करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

स्तोत्र शुद्धि व संपादन

भक्तिलोक स्तोत्र परिषद (Bhaktilok Stotra Council)

प्राचीन स्तोत्रों, कवचों और विभिन्न देव चालीसाओं के व्याकरण सम्मत शुद्ध पाठ और लयबद्ध प्रस्तुतीकरण का संपादन करने वाली शाखा।

शास्त्र-समीक्षा व प्रामाणिकता

पं. गंगाधर शास्त्री शास्त्री (Pt. Gangadhar Shastri)

वेद-वेदांत प्रवक्ता व स्तोत्र संग्रह कर्ता। काशी संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य।

चालीसा पाठ सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें