ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
योगसूत्र महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योग दर्शन का मूल ग्रंथ है। यह १९६ सूत्रों में विभक्त है, जो चार पादों में व्यवस्थित हैं – समाधिपाद, साधनापाद, विभूतिपाद, कैवल्यपाद। यह ग्रंथ योग की परिभाषा, चित्तवृत्तियों का निरोध, अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि), सिद्धियाँ, और कैवल्य (मोक्ष) का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करता है।
समाधिपाद में योग का लक्षण, चित्त की पाँच वृत्तियाँ, और समाधि के भेद बताए गए हैं। साधनापाद में क्रियायोग (तप, स्वाध्याय, ईश्वरप्रणिधान), क्लेश, और अष्टांग योग का विस्तृत वर्णन है। विभूतिपाद में योग से प्राप्त होने वाली अलौकिक शक्तियों (सिद्धियों) का उल्लेख है। कैवल्यपाद में कैवल्य (पूर्ण स्वतंत्रता) के स्वरूप और उसकी प्राप्ति के साधन बताए गए हैं।
योगसूत्र भारतीय दर्शन का एक अद्वितीय ग्रंथ है, जो साधना और सिद्धांत दोनों को समन्वित करता है। इसका प्रभाव आज विश्वभर में योग साधना के माध्यम से फैला हुआ है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल सूत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ योग साधकों, दार्शनिकों, और शोधार्थियों के लिए आधारभूत है।