ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
विष्णु पुराण अट्ठारह महापुराणों में सबसे प्राचीन और प्रामाणिक माना जाता है। यह पुराण छह अंशों में विभक्त है और इसमें भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, सृष्टि की उत्पत्ति, मन्वंतर, राजाओं की वंशावली और भक्ति का अद्भुत वर्णन है। इस ग्रंथ की भाषा संस्कृत में अत्यंत सरल और प्रवाहपूर्ण है, जिससे यह सभी वर्गों के लिए सुलभ हो जाता है।
प्रथम अंश में सृष्टि की रचना, ब्रह्मा का प्राकट्य, वर्णाश्रम धर्म और भगवान विष्णु के अवतारों का संक्षिप्त विवरण है। द्वितीय अंश में पृथ्वी का भूगोल, नक्षत्रों की गति, और समय की गणना (कल्प, युग, मन्वंतर) बताई गई है। तृतीय अंश में मन्वंतरों के देवता, ऋषि और राजा, तथा धर्म के विभिन्न आयाम वर्णित हैं। चतुर्थ अंश सूर्यवंश और चंद्रवंश के राजाओं की विस्तृत वंशावली से भरा है, जिसमें भगवान राम और कृष्ण का वंश भी आता है। पंचम अंश में श्रीकृष्ण की पूरी लीला – गोकुल से द्वारका तक – अत्यंत मनोहारी ढंग से वर्णित है। षष्ठ अंश में कलियुग के लक्षण, प्रलय का वर्णन और मोक्ष का उपदेश है।
विष्णु पुराण में "भगवद् गीता" के समान ही ज्ञान, कर्म और भक्ति का समन्वय दिखता है। यह ग्रंथ विष्णुभक्तों के लिए सर्वोपरि है और इसे पढ़ने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल श्लोकों के साथ सरल व्याख्या दी गई है, जिससे पाठकों को ग्रंथ की गहराई समझने में सुविधा होगी। यह संस्करण घरों में पूजन-पाठ के लिए अत्यंत उपयोगी है।