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वेदान्तसूत्र (ब्रह्मसूत्र) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
दर्शन

वेदान्तसूत्र

Vedanta Sutras
0 कुल अध्याय
59 पठन
hi भाषा
450 पृष्ठ

वेदान्तसूत्र के अनुसार ब्रह्म ही सर्वोच्च सत्य है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

वेदान्तसूत्र (ब्रह्मसूत्र) बादरायण का ग्रंथ है। इसमें ब्रह्म, जीव, जगत और मोक्ष का विवेचन है।
वेदान्तसूत्र पर अनेक भाष्य लिखे गए हैं।

वेदान्तसूत्र, जिसे ब्रह्मसूत्र भी कहा जाता है, महर्षि बादरायण (व्यास) द्वारा रचित वेदांत दर्शन का मूल ग्रंथ है। यह ५५५ सूत्रों में विभक्त है, जो चार अध्यायों में व्यवस्थित हैं – समन्वयाध्याय, अविरोधाध्याय, साधनाध्याय, और फलाध्याय। प्रत्येक अध्याय में चार-चार पाद हैं।

ब्रह्मसूत्र उपनिषदों के दार्शनिक सिद्धांतों को सुसंगत रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें ब्रह्म (सच्चिदानन्द) को जगत का कारण, उसके स्वरूप, जीव और जगत की सत्ता, तथा मोक्ष के साधनों का विवेचन किया गया है। प्रथम अध्याय में ब्रह्म की प्रधानता और सर्वोपरिता सिद्ध की गई है। द्वितीय अध्याय में अन्य दर्शनों के मतों का खंडन कर वेदांत का पक्ष स्थापित किया गया है। तृतीय अध्याय में मोक्ष के साधनों (ज्ञान, श्रवण, मनन, निदिध्यासन) का वर्णन है। चतुर्थ अध्याय में मोक्ष के फल (कैवल्य) का वर्णन है।

वेदान्तसूत्र पर अनेक भाष्य लिखे गए हैं, जिनमें शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, वल्लभाचार्य, निम्बार्काचार्य आदि के भाष्य प्रमुख हैं।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल सूत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ वेदांत दर्शन के अध्ययन का आधार है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
वेदान्तसूत्र (ब्रह्मसूत्र) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
वेदान्तसूत्र
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Vedanta Sutras
श्रेणी (Category)
दर्शन
पृष्ठ संख्या (Pages)
450 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
24 September 2026

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