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वल्लभाचार्य भाष्य (Vallabhacharya Bhashya) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
दर्शन

वल्लभाचार्य भाष्य

Vallabhacharya Bhashya
0 कुल अध्याय
53 पठन
hi भाषा
600 पृष्ठ

वल्लभाचार्य भाष्य के अनुसार भक्ति से ही मोक्ष मिलता है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

वल्लभाचार्य भाष्य वल्लभाचार्य का ब्रह्मसूत्र पर भाष्य है। इसमें शुद्धाद्वैत वेदांत के सिद्धांत प्रतिपादित हैं।
वल्लभाचार्य भाष्य में भगवान कृष्ण को सर्वोच्च ब्रह्म माना गया है।

वल्लभाचार्य भाष्य महाप्रभु वल्लभाचार्य द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र का शुद्धाद्वैत वेदांत पर भाष्य है। यह पुष्टिमार्ग वैष्णव संप्रदाय का आधारभूत ग्रंथ है। वल्लभाचार्य ने इसमें ब्रह्म को सच्चिदानंद, नित्य, शुद्ध, बुद्ध, मुक्त स्वरूप कृष्ण के रूप में स्थापित किया है।

शुद्धाद्वैत के अनुसार जीव और ब्रह्म अभिन्न हैं, लेकिन जीव में आवरण (अज्ञान) के कारण भेद का भास होता है। जगत ब्रह्म का ही स्वरूप है, कोई पृथक सत्ता नहीं। मोक्ष का साधन भक्ति (पुष्टि) है, जो कृष्ण की कृपा से प्राप्त होती है।

वल्लभाचार्य का भाष्य शंकर, रामानुज, मध्व के भाष्यों से भिन्न है। यह शुद्धाद्वैत दर्शन की व्याख्या प्रस्तुत करता है, जिसमें भगवान कृष्ण को सर्वोच्च माना गया है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत भाष्य के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ शुद्धाद्वैत दर्शन, पुष्टिमार्ग, और कृष्ण भक्ति के अध्ययन के लिए उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
वल्लभाचार्य भाष्य (Vallabhacharya Bhashya) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
वल्लभाचार्य भाष्य
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Vallabhacharya Bhashya
श्रेणी (Category)
दर्शन
पृष्ठ संख्या (Pages)
600 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
25 September 2026

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