ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
आदि शंकराचार्य कृत वाक्यवृत्ति – महावाक्यों का विवेचन, ब्रह्म और आत्मा की अभिन्नता।
वाक्यवृत्ति – महावाक्यों की व्याख्या।
वाक्यवृत्ति आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक लघु ग्रंथ है, जो महावाक्यों (तत्त्वमसि, अहं ब्रह्मास्मि आदि) के अर्थ को स्पष्ट करती है। इसमें वाक्य के अर्थ का विवेचन करते हुए ब्रह्म और आत्मा की अभिन्नता को दर्शाया गया है। यह ग्रंथ वेदान्त के अध्ययन के लिए आधारभूत है।
वाक्यवृत्ति में महावाक्यों के विचार और श्रवण-मनन-निदिध्यासन की प्रक्रिया का वर्णन है।
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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)
मूल शीर्षक (Original Title)
वाक्यवृत्ति (शंकर)
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
वाक्यवृत्ति
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Vakyavritti
श्रेणी (Category)
वेदान्त
पृष्ठ संख्या (Pages)
70 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
10 August 2026
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