भक्तिलोक ग्रंथालय
स
स्थापत्यवेद (Sthapatyaveda) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
वास्तुशास्त्र

स्थापत्यवेद

Sthapatyaveda
0 कुल अध्याय
57 पठन
hi भाषा
520 पृष्ठ

इसके सिद्धांत आज भी वास्तुशास्त्र में प्रयुक्त होते हैं।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

स्थापत्यवेद वास्तुकला, शिल्पकला और नगर-निर्माण का प्राचीन शास्त्र है। इसे अथर्ववेद का उपवेद माना जाता है।
स्थापत्यवेद भारतीय वास्तु परंपरा का मूल स्रोत है।

स्थापत्यवेद वास्तुकला, शिल्पकला और नगर-निर्माण का प्राचीन शास्त्र है। इसे अथर्ववेद का उपवेद माना जाता है। इस ग्रंथ में मंदिर-निर्माण, महल-निर्माण, नगर-योजना, मूर्ति-शिल्प, और वास्तु-शास्त्र के सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन है। स्थापत्यवेद के आधार पर ही बाद में विश्वकर्मा, मय, मानसार आदि ग्रंथों की रचना हुई।

स्थापत्यवेद में वास्तु-पुरुष मंडल, दिशाओं का महत्व, भूमि-परीक्षण, भवनों के अनुपात, और गृह-निर्माण के मुहूर्त का विवेचन है। इसमें शिल्पियों के लिए कर्म-विधान, औजारों के निर्माण, और मूर्तिकला के अंग-प्रत्यंग के अनुपात (तालमान) का भी वर्णन है। यह ग्रंथ केवल भवन-निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन, ऊर्जा-प्रवाह और मानव-जीवन की समग्रता पर भी प्रकाश डालता है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में स्थापत्यवेद के मूल सूत्रों के साथ वास्तु-सिद्धांत, नगर-योजना, मंदिर-स्थापत्य और शिल्प-विधान का सरल विवेचन किया गया है। यह पुस्तक वास्तुविदों, शिल्पकारों, वास्तुशास्त्र के अध्येताओं और निर्माण-क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के लिए उपयोगी है।

सर्वाधिक पढ़े जाने वाले लोकप्रिय अध्याय (Top 20 Chapters)

लोकप्रिय अध्यायों की सूची उपलब्ध नहीं है।

ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
स्थापत्यवेद (Sthapatyaveda) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
स्थापत्यवेद
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Sthapatyaveda
श्रेणी (Category)
वास्तुशास्त्र
पृष्ठ संख्या (Pages)
520 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

सभी अध्याय सूची (All Chapters Directory)

अध्याय अभी संकलित किए जा रहे हैं।