ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
शिव पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है और शैव संप्रदाय का आधार ग्रंथ है। यह पुराण सात संहिताओं में विभक्त है – ज्ञानसंहिता, विद्येश्वरसंहिता, रुद्रसंहिता, शतरुद्रसंहिता, कोटिरुद्रसंहिता, उमासंहिता और कैलाससंहिता। इसमें भगवान शिव के स्वरूप, लीलाओं, पूजा विधियों, मंत्रों और भक्ति का अद्भुत वर्णन है।
रुद्रसंहिता में शिव के अवतारों (श्रीकृष्ण, दक्षिणामूर्ति, हनुमान आदि) की कथाएँ हैं। सती-शिव का प्रेम प्रसंग, दक्ष यज्ञ का विध्वंस, पार्वती का तप, कार्तिकेय और गणेश का जन्म – ये सभी कथाएँ अत्यंत रोचक शैली में दी गई हैं। उमासंहिता में शिव-पार्वती के संवाद के माध्यम से धर्म, व्रत, तीर्थ और मोक्ष का उपदेश है। कैलाससंहिता में योग और ज्ञान का विस्तार से वर्णन किया गया है।
शिव पुराण की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसमें शिवलिंग की उत्पत्ति, उसकी पूजा विधि, रुद्राक्ष की महिमा, विभूति (भस्म) का महत्व और शिवरात्रि व्रत की विधि विस्तार से बताई गई है। यह पुराण बताता है कि शिव की उपासना से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और कैवल्य (मोक्ष) की प्राप्ति होती है।
हमारा हिंदी संस्करण मूल संस्कृत श्लोकों के साथ सरल हिंदी भाषा में अनुवाद प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ शिव भक्तों के लिए अमृतसमान है और घरों में नित्य पूजा-पाठ के लिए अत्यंत उपयोगी है।