भक्तिलोक ग्रंथालय
श
शंकरभाष्य (ब्रह्मसूत्र) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
दर्शन

शंकरभाष्य

Shankara Bhashya
0 कुल अध्याय
68 पठन
hi भाषा
750 पृष्ठ

शंकरभाष्य के अनुसार ज्ञान से ही मोक्ष मिलता है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

शंकरभाष्य आदि शंकराचार्य का ब्रह्मसूत्र पर भाष्य है। इसमें अद्वैत वेदांत के सिद्धांत प्रतिपादित हैं।
शंकरभाष्य में निर्गुण ब्रह्म, जीव-ब्रह्मैक्य, और जगत की मिथ्याता का वर्णन है।

शंकरभाष्य आदि शंकराचार्य द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र का सबसे प्रसिद्ध भाष्य है। यह अद्वैत वेदांत का आधारभूत ग्रंथ है। शंकराचार्य ने इस भाष्य में ब्रह्मसूत्र के ५५५ सूत्रों की व्याख्या अद्वैत दृष्टि से की है।

शंकरभाष्य में ब्रह्म को निर्गुण, निराकार, सच्चिदानंद स्वरूप सिद्ध किया गया है। जीव और ब्रह्म की अभिन्नता (जीवब्रह्मैक्य) का प्रतिपादन किया गया है। जगत को मिथ्या (माया) बताया गया है। मोक्ष के साधन के रूप में ज्ञान (ब्रह्मज्ञान) को ही एकमात्र उपाय माना गया है।

शंकरभाष्य पर बाद में वाचस्पति मिश्र, पद्मपाद, सुरेश्वराचार्य आदि ने टीकाएँ लिखीं। यह ग्रंथ अद्वैत वेदांत का सबसे प्रभावशाली ग्रंथ है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत भाष्य के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ अद्वैत दर्शन के अध्ययन, साधना, और शोध के लिए अनिवार्य है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
शंकरभाष्य (ब्रह्मसूत्र) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
शंकरभाष्य
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Shankara Bhashya
श्रेणी (Category)
दर्शन
पृष्ठ संख्या (Pages)
750 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
24 September 2026

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