ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
श्रीभाष्य आचार्य रामानुज द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र का विशिष्टाद्वैत वेदांत पर भाष्य है। यह वैष्णव वेदांत का आधारभूत ग्रंथ है। रामानुजाचार्य ने इसमें ब्रह्म को सगुण, साकार, और सर्वश्रेष्ठ (नारायण) स्वरूप सिद्ध किया है।
श्रीभाष्य में जीव और ब्रह्म को अभिन्न-अभिन्न (विशिष्टाद्वैत) संबंध में बताया गया है – शरीर-आत्मा संबंध के समान। जगत को ब्रह्म का विशेषण माना गया है। भक्ति को मोक्ष का प्रधान साधन बताया गया है। यह भाष्य शंकराचार्य के अद्वैत का खंडन करते हुए वैष्णव धर्म को दार्शनिक आधार प्रदान करता है।
श्रीभाष्य पर वेदांतदेशिक, सुदर्शन सूरी आदि ने टीकाएँ लिखीं। यह ग्रंथ श्रीवैष्णव संप्रदाय का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत भाष्य के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ विशिष्टाद्वैत दर्शन के अध्ययन और वैष्णव धर्म की समझ के लिए उपयोगी है।