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प्रणाग्निहोत्रोपनिषद् – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

प्रणाग्निहोत्रोपनिषद्

Pranagnihotropanishad
0 कुल अध्याय
52 पठन
hi भाषा
55 पृष्ठ

प्राणों की आहुति – आन्तरिक यज्ञ का रहस्य।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

प्रणाग्निहोत्रोपनिषद् आन्तरिक यज्ञ की विधि बताती है, जिसमें प्राणों को अग्नि और आहार को हवि मानकर साधना की जाती है।
प्राणाग्निहोत्र – शरीर के भीतर यज्ञ।

प्रणाग्निहोत्रोपनिषद् योग और तन्त्र पर आधारित एक उपनिषद है। इसमें प्राण (श्वास) को यज्ञ की अग्नि के रूप में स्थापित करके आन्तरिक यज्ञ (प्राणाग्निहोत्र) की विधि बताई गई है।

यह उपनिषद् बताती है कि कैसे प्राणायाम और ध्यान के द्वारा शरीर के भीतर ही यज्ञ सम्पन्न किया जाता है। यह हठयोग और वेदान्त का समन्वय है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
प्रणाग्निहोत्रोपनिषद् – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
प्रणाग्निहोत्रोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Pranagnihotropanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
55 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
25 September 2026

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