भक्तिलोक ग्रंथालय
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परिमल (अप्पय दीक्षित) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
वेदान्त

परिमल

Parimala
0 कुल अध्याय
43 पठन
hi भाषा
380 पृष्ठ

भामती-कल्पतरु परम्परा का समन्वय करने वाली कृति।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

परिमल अप्पय दीक्षित की टीका है, जो भामती-कल्पतरु परम्परा का समन्वय करती है।
अप्पय दीक्षित द्वारा अद्वैत वेदान्त का महत्वपूर्ण ग्रन्थ।

परिमल अप्पय दीक्षित द्वारा रचित एक प्रसिद्ध टीका है। यह ग्रन्थ विशेष रूप से अद्वैत सिद्धांतों की रक्षा के लिए लिखा गया था।

अप्पय दीक्षित ने इसमें भामती और कल्पतरु के मतों का समन्वय करते हुए अद्वैत के सूक्ष्मतम पक्षों को उजागर किया है। यह ग्रन्थ अद्वैत वेदान्त के उच्चतर अध्ययन के लिए आवश्यक है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
परिमल (अप्पय दीक्षित) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
परिमल
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Parimala
श्रेणी (Category)
वेदान्त
पृष्ठ संख्या (Pages)
380 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
24 September 2026

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