ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
पद्म पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसे "पद्म" नाम विष्णु के नाभिकमल से उत्पन्न ब्रह्मा के कारण मिला। यह पुराण पाँच खंडों में विभाजित है – सृष्टिखंड, भूमिखंड, स्वर्गखंड, पातालखंड और उत्तरखंड। प्रत्येक खंड में भगवान विष्णु की महिमा, भक्ति मार्ग, व्रत-त्योहार और पौराणिक कथाओं का सुंदर चित्रण है।
सृष्टिखंड में सृष्टि की उत्पत्ति, धर्म की स्थापना और विभिन्न युगों का वर्णन है। भूमिखंड में पृथ्वी के तीर्थों, नदियों और पर्वतों का महात्म्य बताया गया है। स्वर्गखंड में स्वर्गलोक, देवताओं के वैभव और दान-पुण्य के फलों का विवरण है। पातालखंड में नागलोक, राक्षसों की कथाएँ और विष्णु के अवतारों का वर्णन है। उत्तरखंड सबसे महत्वपूर्ण है – इसमें भगवान शिव द्वारा पार्वती को उपदेशित "भागवत महात्म्य" है, जो श्रीमद्भागवत की महिमा का गान करता है।
पद्म पुराण में भक्ति को सर्वोच्च मार्ग बताया गया है। इसमें रामायण, महाभारत और भागवत के अंश भी मिलते हैं। विशेष रूप से "क्रियायोगसार" नामक अध्याय में योग, ज्ञान और भक्ति का समन्वय किया गया है। यह पुराण वैष्णव संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है और इसे पढ़ने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
हमारा हिंदी संस्करण सभी पाँच खंडों का सरल अनुवाद प्रस्तुत करता है, जिसमें मूल श्लोकों के साथ भावार्थ दिया गया है। यह ग्रंथ भक्तों, विद्वानों और धार्मिक अध्ययन करने वालों के लिए अमूल्य है।