ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
निम्बार्क भाष्य आचार्य निम्बार्क (निम्बादित्य) द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र का द्वैताद्वैत वेदांत पर भाष्य है। यह निम्बार्क संप्रदाय (सनकादि संप्रदाय) का आधारभूत ग्रंथ है। निम्बार्काचार्य ने इसमें ब्रह्म, जीव, जगत को भेद-अभेद (द्वैताद्वैत) संबंध में स्थापित किया है।
द्वैताद्वैत के अनुसार ब्रह्म और जीव में स्वाभाविक भेद और अभेद दोनों हैं – जैसे सूर्य और उसकी किरणें, या सर्प और उसकी कुंडली। ब्रह्म सगुण, साकार, राधा-कृष्ण स्वरूप है। भक्ति और प्रपत्ति (शरणागति) मोक्ष के साधन हैं।
निम्बार्क भाष्य पर केशव काश्मीरी, श्रीनिवासाचार्य आदि ने टीकाएँ लिखीं। यह ग्रंथ द्वैताद्वैत दर्शन और राधा-कृष्ण भक्ति के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत भाष्य के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ निम्बार्क संप्रदाय और भेद-अभेद दर्शन की समझ के लिए उपयोगी है।