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मुण्डकोपनिषद् (Mundaka Upanishad) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

मुण्डकोपनिषद्

Mundaka Upanishad
0 कुल अध्याय
62 पठन
hi भाषा
135 पृष्ठ

मुण्डकोपनिषद् का प्रसिद्ध मंत्र "सत्यमेव जयते" है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

मुण्डकोपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध है, जिसमें परा और अपरा विद्या का विवेचन है।
मुण्डकोपनिषद् अज्ञान के मुंडन की उपमा देती है।

मुण्डकोपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध है। इसे "मुण्डक" इसलिए कहते हैं क्योंकि यह ब्रह्मज्ञान को मुंडन (मुंड) के समान बताती है – जैसे मुंडन से केशों का अज्ञान दूर होता है, वैसे ही यह उपनिषद् अज्ञान को दूर करती है। यह दो खंडों में विभक्त है, जिनमें परा और अपरा विद्या का भेद किया गया है।

अपरा विद्या वेद, वेदांग, कल्प, व्याकरण आदि है, जबकि परा विद्या वह है जिससे अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति होती है। उपनिषद् में प्रसिद्ध मंत्र "सत्यमेव जयते नानृतम्" (सत्य की ही जीत होती है, असत्य की नहीं) भारत के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य के रूप में प्रसिद्ध है।

मुण्डकोपनिषद् में ब्रह्म को "अव्यक्त", "सर्वव्यापक" और "अनादि" बताया गया है। इसमें योग और संन्यास के मार्ग से ब्रह्मप्राप्ति का उपदेश है। यह उपनिषद् विशेष रूप से संन्यासियों के लिए मार्गदर्शक है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
मुण्डकोपनिषद् (Mundaka Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
मुण्डकोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Mundaka Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
135 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
25 September 2026

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