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मीमांसासूत्र (जैमिनि) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
दर्शन

मीमांसासूत्र

Mimamsa Sutras
0 कुल अध्याय
48 पठन
hi भाषा
650 पृष्ठ

मीमांसासूत्र के अनुसार वेद ही धर्म के एकमात्र प्रमाण हैं।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

मीमांसासूत्र जैमिनि का ग्रंथ है। इसमें वैदिक कर्मकांड, यज्ञ विधियाँ, और धर्म का स्वरूप वर्णित है।
मीमांसासूत्र में छह प्रमाणों और वाक्यों के अर्थ निर्धारण की विधि है।

मीमांसासूत्र महर्षि जैमिनि द्वारा रचित मीमांसा दर्शन का मूल ग्रंथ है। यह वेदों के कर्मकांड, यज्ञ विधियों, धर्म के स्वरूप, और वाक्यों की व्याख्या पर केंद्रित है। मीमांसासूत्र में १२ अध्याय हैं, जिनमें कुल लगभग २७०० सूत्र हैं।

मीमांसा दर्शन के अनुसार वेद अपौरुषेय (अपौरुषेय) हैं और धर्म का ज्ञान केवल वेदों से ही होता है। इसमें प्रमाणों में प्रत्यक्ष, अनुमान, शब्द, उपमान, अर्थापत्ति, अनुपलब्धि – छह प्रमाण माने गए हैं। यह दर्शन वैदिक यज्ञों की व्याख्या, अधिकारियों के कर्तव्य, और वाक्यों के अर्थ निर्धारण के लिए शब्दशक्ति (अभिधा, लक्षणा, व्यंजना) का विवेचन करता है।

मीमांसासूत्र भारतीय व्याकरण, न्यायशास्त्र, और धर्मशास्त्र की नींव में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके सिद्धांतों ने बाद के दार्शनिक ग्रंथों, विशेषकर वेदांत दर्शन को गहराई से प्रभावित किया।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल सूत्रों के साथ सरल भाषा में व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ दर्शनशास्त्र, धर्मशास्त्र, और संस्कृत व्याकरण के अध्ययन के लिए आवश्यक है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
मीमांसासूत्र (जैमिनि) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
मीमांसासूत्र
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Mimamsa Sutras
श्रेणी (Category)
दर्शन
पृष्ठ संख्या (Pages)
650 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
25 September 2026

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