ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
मार्कण्डेय पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है "देवी माहात्म्य" (दुर्गा सप्तशती) जो इसी पुराण का अंग है। यह पुराण ऋषि मार्कण्डेय द्वारा कहा गया माना जाता है और इसमें धर्म, भक्ति, तीर्थ, व्रत और देवी की महिमा का अद्भुत वर्णन है।
मार्कण्डेय पुराण में १३७ अध्याय हैं। प्रारंभ में जैमिनि ऋषि मार्कण्डेय से धर्म के प्रश्न पूछते हैं, जिनके उत्तर में यह ग्रंथ प्रकट होता है। इसमें चार प्रमुख खंड हैं – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) ७०० श्लोकों में देवी के तीन चरित्रों का वर्णन करता है – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती स्वरूप में। यह खंड नवरात्रि में पाठ किया जाता है।
इस पुराण में अन्य महत्वपूर्ण कथाएँ भी हैं – सती-शिव का विवाह, दक्ष यज्ञ, मदालसा उपाख्यान, और राजा हरिश्चन्द्र की कथा। इसमें योग, सांख्य और भक्ति का समन्वय दिखता है। मार्कण्डेय पुराण बताता है कि देवी की उपासना से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ सरल भाषा में व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ शक्ति उपासकों, विद्वानों और धार्मिक अध्ययन करने वालों के लिए अमूल्य है।