ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
मध्वभाष्य मध्वाचार्य का ब्रह्मसूत्र पर भाष्य है। इसमें द्वैत वेदांत के पंचभेद सिद्धांत प्रतिपादित हैं।
मध्वभाष्य में विष्णु को सर्वोच्च और भक्ति को मोक्ष का साधन माना गया है।
मध्वभाष्य आचार्य मध्व (मध्वाचार्य) द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र का द्वैत वेदांत पर भाष्य है। यह द्वैत दर्शन का आधारभूत ग्रंथ है। मध्वाचार्य ने इसमें ब्रह्म, जीव, जगत को पारस्परिक रूप से सर्वथा भिन्न (द्वैत) सिद्ध किया है।
मध्वभाष्य में पंचभेद (जीव-ईश्वर, जीव-जीव, जीव-जगत, जगत-ईश्वर, जगत-जगत में भेद) का प्रतिपादन किया गया है। ब्रह्म को विष्णु (नारायण) कहा गया है। भक्ति को मोक्ष का साधन माना गया है, और भक्ति के लिए वैदिक कर्मों का पालन आवश्यक बताया गया है।
मध्वभाष्य पर जयतीर्थ, व्यासराय आदि ने टीकाएँ लिखीं। यह ग्रंथ द्वैत वेदांत और हरिदास संप्रदाय का मूल ग्रंथ है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत भाष्य के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ द्वैत दर्शन के अध्ययन और वैष्णव धर्म की द्वैत व्याख्या के लिए उपयोगी है।
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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)
मूल शीर्षक (Original Title)
मध्वभाष्य (Madhva Bhashya) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
मध्वभाष्य
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Madhva Bhashya
श्रेणी (Category)
दर्शन
पृष्ठ संख्या (Pages)
700 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
10 August 2026
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