ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
केनोपनिषद् पर शंकराचार्य का भाष्य, जिसमें ब्रह्म की अविषयता और अनुभवगम्यता का विवेचन है।
केनोपनिषद् का शंकराचार्य का अद्वैत भाष्य।
केनोपनिषद् भाष्य शंकराचार्य द्वारा लिखित है। यह उपनिषद् ब्रह्म के स्वरूप को "प्रतिबोध-विदितम्" (हर चेतना में अनुभूत) के रूप में दर्शाती है। इसमें देवासुर संवाद के माध्यम से आत्म-ज्ञान की श्रेष्ठता बताई गई है।
शंकराचार्य ने भाष्य में ब्रह्म को इन्द्रियों से परे, फिर भी अनुभवसिद्ध बताया है। यह उपनिषद् वेदान्त के मूल सिद्धांतों को समझने हेतु आवश्यक है।
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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)
मूल शीर्षक (Original Title)
केनोपनिषद्भाष्य (शंकराचार्य) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
केनोपनिषद्भाष्य
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Kenopanishad Bhashya
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
150 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
24 September 2026
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