भक्तिलोक ग्रंथालय
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केनोपनिषद् (Kena Upanishad) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

केनोपनिषद्

Kena Upanishad
0 कुल अध्याय
66 पठन
hi भाषा
95 पृष्ठ

केनोपनिषद् में ब्रह्म को मन-वाणी से परे बताया गया है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

केनोपनिषद् सामवेद से संबद्ध उपनिषद् है, जिसमें ब्रह्म को सर्वप्रेरक के रूप में बताया गया है।
केनोपनिषद् में देवताओं की शक्ति का स्रोत ब्रह्म को बताया गया है।

केनोपनिषद् सामवेद से संबद्ध एक प्रमुख उपनिषद् है। इसे "केन" शब्द से प्रारंभ होने के कारण यह नाम मिला। यह उपनिषद् चार खंडों में विभक्त है, जिसमें ब्रह्म के स्वरूप, उसकी अनुभूति और ज्ञान की महिमा का वर्णन है। इसमें ब्रह्म को "सर्वस्य प्रेरक" के रूप में दर्शाया गया है – जो मन, वाणी और प्राण से परे है, फिर भी उन सब को चलाने वाला है।

उपनिषद् के प्रथम भाग में संवाद के माध्यम से बताया गया कि ब्रह्म ही सभी देवताओं की शक्ति का स्रोत है। द्वितीय भाग में उमा (पार्वती) देवी के माध्यम से ब्रह्मज्ञान का उपदेश दिया गया। तीसरे और चौथे भाग में आत्मसाक्षात्कार के मार्ग और उसके फलों का वर्णन है। केनोपनिषद् में "प्रतिबोधविदितम्" कहकर यह स्पष्ट किया गया कि ब्रह्म को साधारण ज्ञान से नहीं, अपितु आत्म-साक्षात्कार से ही जाना जा सकता है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
केनोपनिषद् (Kena Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
केनोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Kena Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
95 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
25 September 2026

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