भक्तिलोक ग्रंथालय
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कठोपनिषद् (Katha Upanishad) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

कठोपनिषद्

Katha Upanishad
0 कुल अध्याय
67 पठन
hi भाषा
180 पृष्ठ

नचिकेता ने यमराज से आत्मज्ञान प्राप्त किया।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

कठोपनिषद् नचिकेता और यमराज के संवाद पर आधारित है, जिसमें आत्मा और मोक्ष का विवेचन है।
कठोपनिषद् का प्रसिद्ध मंत्र "उत्तिष्ठत जाग्रत" आत्मसाक्षात्कार का आह्वान है।

कठोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद की कठ शाखा से संबद्ध है। यह नचिकेता और यमराज के संवाद के रूप में प्रसिद्ध है। इसमें आत्मा, मृत्यु, और ब्रह्मज्ञान के गूढ़ रहस्यों को सरल कथा के माध्यम से समझाया गया है। नचिकेता ने अपने पिता के क्रोध में यमराज के पास जाकर तीन वरदान माँगे, और अंततः आत्मज्ञान की प्राप्ति की।

उपनिषद् में "श्रेय" और "प्रेय" का भेद स्पष्ट किया गया है – श्रेय वह है जो अंततः कल्याणकारी होता है, जबकि प्रेय तात्कालिक सुख देता है। नचिकेता ने श्रेय का चयन किया। यमराज ने उसे आत्मा के स्वरूप, योग, और मोक्ष के मार्ग का उपदेश दिया। इस उपनिषद् का प्रसिद्ध मंत्र "उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत" (उठो, जागो, और श्रेष्ठ पुरुषों से ज्ञान प्राप्त करो) आज भी प्रेरणादायक है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
कठोपनिषद् (Katha Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
कठोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Katha Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
180 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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