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ईशावास्योपनिषद् (Ishavasya Upanishad) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

ईशावास्योपनिषद्

Ishavasya Upanishad
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51 पठन
hi भाषा
120 पृष्ठ

ईशावास्योपनिषद् ज्ञान और कर्म दोनों का समन्वय करती है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

ईशावास्योपनिषद् शुक्ल यजुर्वेद की अंतिम संहिता में स्थित १८ मंत्रों का उपनिषद् है। यह ज्ञान और कर्म का समन्वय सिखाती है।
ईशावास्योपनिषद् में "ईशा वास्यमिदं सर्वम्" का सिद्धांत प्रतिपादित है।

ईशावास्योपनिषद् शुक्ल यजुर्वेद की संहिता के अंतिम अध्याय में स्थित है। यह १८ मंत्रों का लघु उपनिषद् है, जो ज्ञान और कर्म दोनों का समन्वय सिखाता है। प्रथम मंत्र ही मूल सिद्धांत बताता है – "ईशा वास्यमिदं सर्वम्", अर्थात संपूर्ण जगत ईश्वर से आवृत है। इस दृष्टि से साधक को त्याग और भोग में संतुलन बनाना चाहिए।

उपनिषद् में कहा गया है कि जो व्यक्ति सभी प्राणियों में आत्मा का दर्शन करता है, वह सर्वत्र एकता का अनुभव करता है। ऐसा ज्ञानी सभी प्राणियों के कल्याण में लगा रहता है। यह उपनिषद् अद्वैत वेदांत का आधार है। इसमें कर्म करने का महत्व बताया गया है, लेकिन आसक्ति रहित कर्म की प्रेरणा दी गई है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
ईशावास्योपनिषद् (Ishavasya Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
ईशावास्योपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Ishavasya Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
120 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
25 September 2026

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