ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
यजुर्वेदीय उपनिषद, हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा) का स्वरूप।
हैरण्यगर्भोपनिषद् – सृष्टि-रचना की उपनिषद।
हैरण्यगर्भोपनिषद् यजुर्वेद से संबद्ध एक लघु उपनिषद है। यह सृष्टि के आदि कारण, ब्रह्म के रूप में हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा) का वर्णन करती है। इसमें यह बताया गया है कि हिरण्यगर्भ ही सृष्टि का मूल है और सब कुछ उसी से उत्पन्न होता है।
यह उपनिषद् सृष्टि-रचना और ब्रह्म के विराट स्वरूप पर प्रकाश डालती है।
सर्वाधिक पढ़े जाने वाले लोकप्रिय अध्याय (Top 20 Chapters)
लोकप्रिय अध्यायों की सूची उपलब्ध नहीं है।
ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)
मूल शीर्षक (Original Title)
हैरण्यगर्भोपनिषद् (Hiranyagarbha Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
हैरण्यगर्भोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Hiranyagarbha Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
70 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
10 August 2026
सभी अध्याय सूची (All Chapters Directory)
अध्याय अभी संकलित किए जा रहे हैं।